खामोश आँसू

Qita By Furkan S Khan

Kaafiya: छुपाए, बहते, सहते

Radeef: रहते हैं


दिल में दर्द छुपाए हम रहते हैं,
आँखों से आँसू बस बहते रहते हैं।
कोई पूछे तो क्या कहें हाल-ए-दिल,
बस यूँ ही गम को हम सहते रहते हैं।



Qita By Furkan S Khan

Kaafiya: सारे, बेचारे, सहारे


उम्मीदों के दीप बुझ गए सारे,
अंधेरे में हम रह गए बेचारे।
क्या करें अब, कहाँ जाएँ दिल लेकर,
जब टूट गए सारे सहारे।