यह सूक्ष्म काव्य ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण को दर्शाता है। कवि कहता है कि ईश्वर हर जगह व्याप्त है, और उसका प्रेम उसी में समाया हुआ है। जब उसे ईश्वर की प्राप्ति हुई, तो उसे सब कुछ मिल गया। अब उसे किसी और चीज़ की चाह नहीं है, केवल ईश्वर ही उसका सर्वस्व है। इसमें 'बलिहारी' का अर्थ है 'न्योछावर' या 'कुर्बान'।