महबूब की नज़र

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: असर, नज़र, सफ़र  |  Radeef: है
हर सू बस तेरा ही मुझ पे असर है, क्या करूँ, हर पल तेरी ही नज़र है। तेरी याद में कटती है रात और सहर, इश्क़ की राह में ये कैसा मेरा सफ़र है।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: ख़बर, गुज़र, फ़िकर, बसर  |  Radeef: है
दिल की हर धड़कन में बस तेरी ही ख़बर है, बिन तेरे ज़िंदगी अब कैसे गुज़र है। मेरी हर सुबह, हर शाम में तेरी ही फ़िकर है, तेरी यादों से ही तो मेरा हर पल बसर है।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: वफ़ा, दवा, रज़ा, सज़ा  |  Radeef: है
तेरे इश्क़ में ही अब मेरी हर वफ़ा है, तू ही मेरी हर मर्ज़ की अब दवा है। तेरी याद में जीना, यही तो रज़ा है, तेरे बिना ये ज़िंदगी भी क्या सज़ा है।