जीवन की पुकार

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: सफ़र, खबर, असर, हुनर, डगर, नज़र, गुज़र  |  Radeef: है
ज़िंदगी एक अनमोल सा हसीन सफ़र है, हर मोड़ पे मिलती नई एक खबर है। कभी धूप कभी छाँव, ये इसका असर है, हर पल को जी ले, यही तो हुनर है। क्या खोया क्या पाया, ना इसकी फ़िकर है, बस चलते रहना, यही इसकी डगर है। 'फ़ुरकान' ये ज़िंदगी बस इक पल की गुज़र है, जी ले इसे तू, यही तो तेरा हुनर है।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: दिखा, सिखा, रुला, बता, मिटा, भर, चली  |  Radeef: जाती है
ज़िंदगी हर पल एक नया रंग दिखा जाती है, कभी हँसाती है, कभी कुछ सिखा जाती है। कभी आँसू देती, कभी मुस्कुरा जाती है, अपने हर अंदाज़ से जीना बता जाती है। जो समझा इसे, वो इसकी कदर कर जाता है, जो ना समझा, वो बस यूँ ही मिटा जाती है। 'फ़ुरकान' ये दुनिया है एक चलती हुई नदी, जो भी आया इसमें, बहती चली जाती है।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: कहाँ, जहाँ, बहा, निशाँ, सजा  |  Radeef: जाना है
हमसफ़र बन के कहाँ तक हमें जाना है, मंज़िलें दूर हैं, बस चलते ही जाना है। हर कदम पर कोई नया सा ये जहाँ है, एक अजब राह पर, बस चलते ही जाना है। क्या खोया क्या पाया, ना इसकी फ़िकर है, अपने ही धुन में हमें यूँ ही बह जाना है। 'फ़ुरकान' ये ज़िंदगी बस एक पल की है, हर मोड़ पर नए ख्वाब सजाते जाना है।