उठो, चलो, बढ़ो
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: रुकना, भरना, छूना, मुड़ना | Radeef: तुम
जब तक न मंजिल मिले, रुकना नहीं तुम
हर कदम पर नया जोश, भरना नहीं तुम
डर का साया कभी, छूना नहीं तुम
सफलता की राह से, मुड़ना नहीं तुम
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: करना, हरना, सीखना, बढ़ना | Radeef: है
हर मुश्किल का तुमको, सामना करना है
डर को अपने मन से, अब हरना है
गिरकर फिर से उठो, यही तो सीखना है
सफलता की ओर हर पल, तुम्हें बढ़ना है
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: आती, दिखाती, बुलाती, जाती | Radeef: है
हर सुबह एक नया अवसर, लेकर आती है
जीवन की राहें तुम्हें, राह दिखाती है
डर को छोड़ो, हिम्मत तुम्हें बुलाती है
मंज़िल तुम्हारी इंतज़ार, करती जाती है