जीवन की राह

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: इम्तिहान, पहचान, थकान, इंसान
जीवन एक सफर है, हर कदम पर इम्तिहान। गिरते-पड़ते चलते रहो, यही है इसकी पहचान। धूप-छाँव का खेल है, कभी खुशी कभी थकान। हौसला न छोड़ो कभी, यही सच्चा इंसान।

Qita — By Furkan S Khan

Kaafiya: गँवा, समाँ, नफा, पा
ये ज़िंदगी है पल दो पल की, इसे यूँ ही न गँवा। हर लम्हे को जी भर जी ले, फिर न मिलेगा ये समाँ। रिश्तों को संजो ले प्यारे, यही है सच्चा नफा। खुशियों की तलाश में मत भटक, खुशियों को खुद में पा।