उड़ान का इरादा

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: डरो, हटो, उठो, छोड़ो, बैठो, ढँको, उलझो  |  Radeef: नहीं
जो है दिल में, उसे कहने से डरो नहीं, मंज़िल दूर है तो राह से हटो नहीं। गिर गए हो अगर, तो फिर से उठो चलो, थक गए हो अगर, तो हिम्मत को छोड़ो नहीं। ये ज़िंदगी एक जंग है, लड़ना तो पड़ेगा, हारने के डर से तुम यहाँ बैठो नहीं। उजालों की किरणें खुद ही मिलेंगी तुम्हें, अंधेरों से यूँ तुम खुद को ढँको नहीं। फुरकान, हर सुबह एक नई आस लेकर आती है, बीते कल के गम में यूँ तुम उलझो नहीं।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: ज़माना, निभाना, बहाना, तराना, ठिकाना, आज़माना, फ़साना, दिखाना, सुहाना, मुस्कुराना  |  Radeef: जाना
ये दुनिया है, इसे अपना ज़माना जाना, हर पल को तू हँसकर बस निभाना जाना। कोई भी मुश्किल आए, न देना बहाना जाना, जीत का ही तू अपना अब तराना जाना। गिर कर उठना है, ये ही तेरा ठिकाना जाना, नए रास्तों पे खुद को आज़माना जाना। हर अंधेरे में भी उम्मीद का फ़साना जाना, रोशनी बनके सबको राह दिखाना जाना। फुरकान, ये ज़िंदगी है एक हसीन पल सुहाना, हर दर्द को तू इसमें मुस्कुराना जाना।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: कहाँ, जहाँ, निशाँ, गुमाँ, बयाँ, धुआँ, जवाँ, मकां  |  Radeef: है
तेरी मंज़िल अभी दूर कहाँ है, तेरा हौसला ही तो तेरा जहाँ है। क्यों ढूंढता है तू औरों में निशाँ, तेरा अपना ही तो एक गुमाँ है। हर सुबह एक नई कहानी का बयाँ है, क्यों बीते कल में तेरा दिल धुआँ है। जो तू चाहे, वो सब हासिल होगा, बस खुद में छुपा एक आग जवाँ है। फुरकान, उठो और देखो ये आलम, तेरी हिम्मत से रोशन हर मकां है।