उदासी का सफर
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: करार, खुमार, बहार, इकरार, पुकार | Radeef: नहीं
ज़िंदगी में अब कहीं मिलता करार नहीं,
दिल में अब कोई नया उठता खुमार नहीं।
रोशनी है पर कहाँ वो शब-ए-बहार नहीं,
अब निगाहों में किसी का इंतज़ार नहीं।
क्या बताऊँ किस कदर दिल में इकरार नहीं,
आजकल तो खुद पे भी मुझको ऐतबार नहीं।
मेरे आँसू भी अब तो करते पुकार नहीं,
इस उदासी का कोई मुझ पर वार नहीं।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: गहरा, चेहरा, पहरा, सवेरा, बहरा | Radeef: है
ये दर्द-ए-दिल बड़ा ही गहरा है,
हर ज़ख्म पर एक नया चेहरा है।
रातों को यादों का पहरा है,
खोया हुआ मेरा हर सवेरा है।
अब तो हर बात पर दिल बहरा है,
कौन समझे जो दर्द का डेरा है।
कैसे कहूँ कि कौन मेरा है,
जब गमों ने हर तरफ से घेरा है।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: अफसाना, बेगाना, माना, पहचाना, दीवाना | Radeef: जाना
मेरी तन्हाई का अब क्या है अफसाना,
सारा जग ही मुझको लगे बेगाना।
हर खुशी से अब तो दूर है जाना,
दर्द को ही मैंने अपना यार माना।
कौन है जो मेरा दर्द पहचाना,
बन गया हूँ मैं तो एक दीवाना।
कोई नहीं अब मेरा ठिकाना,
बस ग़मों का ही है अब तराना।