इस नज़्म में 'ज़िंदगी' को एक 'आईना' (दर्पण) बताया गया है, जो हमें कभी स्पष्ट रूप से खुद को दिखाता है और कभी धुंधला होकर भी कुछ महत्वपूर्ण सबक सिखा जाता है। 'धुंधला' होना जीवन की कठिनाइयों और अनिश्चितताओं का प्रतीक है। हर 'लम्हा' (क्षण) जीवन में कुछ नया रंग भरता है और एक नई कहानी लिखता है। अंत में, जो व्यक्ति जीवन के इस स्वरूप को समझ लेता है, वही अपने 'सच्चे पथ' (सही मार्ग) को पहचान पाता है।
इस नज़्म में 'जीवन' को एक मधुर 'धुन' (संगीत) की तरह प्रस्तुत किया गया है, जिसे हमें पूरी लगन से गाना चाहिए। इसमें 'खुशियों के रंग' भरने का अर्थ है जीवन को आनंद और सकारात्मकता से भरना। कवि प्रेरणा देते हैं कि जो 'गुज़रा वो एक पल था' (बीता हुआ समय) उसे भूलकर आगे बढ़ना चाहिए और हर 'आने वाले लम्हे' (आने वाले क्षण) को पूरी तरह से जीना चाहिए। यह नज़्म जीवन को वर्तमान में जीने और हर पल का उत्सव मनाने का संदेश देती है।