ईरान ने अमेरिका पर लगाया गंभीर आरोप

ईरान की विदेश मंत्रालय ने आज सुबह एक आधिकारिक बयान जारी करके अमेरिका पर अपने शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमले का गंभीर आरोप लगाया है। बयान के अनुसार, यह हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और संकल्प 2231 का उल्लंघन है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। ईरान का कहना है कि यह हमला अमेरिका और इजरायल के बीच साजिश का हिस्सा है, जो क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने की कोशिश है।

हमले का प्रभाव और स्थिति

मीडिया रिपोर्ट (22 जून 2025) के अनुसार, ईरान के फोर्डो और नतांज जैसे प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमले हुए हैं। हालांकि, ईरान ने दावा किया है कि इन सुविधाओं से पहले ही सामग्री हटा ली गई थी, जिससे नुकसान सीमित रहा। पूर्व अमेरिकी अधिकारी मार्क किमिट ने बीबीसी को बताया कि अमेरिकी दावों पर संदेह है कि इन सुविधाओं को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है, क्योंकि स्वतंत्र सत्यापन की कमी है।

महत्वपूर्ण तथ्य: इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) ने अभी तक विकिरण में वृद्धि की पुष्टि नहीं की है, लेकिन स्थिति की निगरानी जारी है।

इस तनाव की शुरुआत 13 जून 2025 को इजरायल के आश्चर्यजनक हमले से हुई, जिसमें ईरान के सतह-से-सतह मिसाइल लॉन्चरों का एक तिहाई हिस्सा नष्ट कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट(16 जून 2025) के अनुसार, यह अभियान अमेरिका के साथ समन्वय में किया गया, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संघर्ष और गहरा गया है। ईरान ने आत्मरक्षा के अधिकार का हवाला देते हुए सभी विकल्प खुले रखने की चेतावनी दी है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और आह्वान

ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, IAEA, और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से इस हमले की निंदा करने और तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इस तरह की चुप्पी विश्व को अराजकता की ओर ले जाएगी। दूसरी ओर, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति और बढ़ सकती है यदि ईरान अमेरिकी संपत्तियों पर जवाबी कार्रवाई करता है।

क्या होगा आगे?

वर्तमान में, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अपने चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में स्थिति और स्पष्ट होगी, खासकर यदि IAEA की रिपोर्ट में कोई ठोस सबूत सामने आते हैं। इस बीच, क्षेत्रीय शांति के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

स्रोत: X पोस्ट (@IRIMFA_EN), मीडिया रिपोर्ट, IAEA