नई दिल्ली/अजमेर:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 813वें उर्स के अवसर पर अजमेर शरीफ दरगाह में चढ़ाने के लिए चादर भेजी है। यह परंपरा हर वर्ष प्रधानमंत्री की ओर से निभाई जाती है, जो सांप्रदायिक सौहार्द और आध्यात्मिक एकता का प्रतीक मानी जाती है।
प्रधानमंत्री ने चादर भेजी
प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी को चादर सौंपी। यह चादर अजमेर दरगाह में पेश की जाएगी, जहां लाखों श्रद्धालु उर्स में हिस्सा लेने आते हैं।
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर कहा:
वार्षिक परंपरा का हिस्सा
प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी हर वर्ष उर्स के अवसर पर चादर भेजते रहे हैं। यह परंपरा उनके प्रधानमंत्री बनने के पहले कार्यकाल से ही चल रही है और यह उनकी 11वीं पेशकश है।
उर्स के दौरान अजमेर दरगाह में हजारों लोग इकट्ठा होते हैं, जो देशभर से और विदेशों से भी आते हैं। उर्स का यह पर्व सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की पुण्यतिथि के रूप में मनाया जाता है।
अजमेर शरीफ का महत्व
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती भारत के सबसे प्रसिद्ध सूफी संतों में से एक थे, जिन्होंने प्यार, शांति और भाईचारे का संदेश दिया। उनकी दरगाह अजमेर में स्थित है और यह भारत के सबसे पवित्र सूफी स्थलों में गिनी जाती है।
अजमेर शरीफ दरगाह में हर साल उर्स के अवसर पर विशाल आयोजन होता है, जिसमें कव्वाली, धार्मिक प्रवचन और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की पहल का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अजमेर शरीफ के लिए चादर भेजना देश की गंगा-जमुनी तहजीब और धार्मिक सहिष्णुता का उदाहरण है। यह कदम विभिन्न धर्मों के बीच सद्भावना और भाईचारे को बढ़ावा देने के लिए उठाया जाता है।
उर्स के मुख्य आकर्षण:
- संध्या कव्वाली: दरगाह में देशभर के प्रसिद्ध कव्वाल अपनी प्रस्तुति देते हैं।
- प्रार्थना और धार्मिक आयोजन: हर दिन विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है।
- चादर पेश करना: उर्स के दौरान विभिन्न समुदायों के लोग चादर चढ़ाकर अपने श्रद्धा का प्रदर्शन करते हैं।
सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक
अजमेर शरीफ दरगाह में सभी धर्मों के लोग आते हैं और यहां पर किसी जाति या पंथ का भेदभाव नहीं किया जाता। यह स्थान धर्मनिरपेक्षता और सर्वधर्म समभाव का प्रतीक है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पहल को विभिन्न धार्मिक नेताओं और समुदायों द्वारा सराहा गया है। इससे समाज में एकता, प्रेम और शांति का संदेश फैलता है।
ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के 813वें उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी द्वारा अजमेर शरीफ दरगाह के लिए चादर भेजना भारतीय संस्कृति की विविधता और धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है। यह परंपरा भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द को सुदृढ़ करती है।