उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के ब्लॉक जरवल के ग्राम सभा मीरगंज में स्थित प्राथमिक विद्यालय रसूलपुरनिजामी में बच्चों की शिक्षा और भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। विद्यालय के शिक्षक नवीन श्रीवास्तव समेत अन्य स्टाफ का व्यवहार शिक्षा के प्रति लापरवाही भरा है। वे नियमित रूप से सरकारी समय सारणी का उल्लंघन कर दोपहर 3:00 बजे के बजाय 1:00 बजे ही स्कूल में ताला लगाकर गायब हो जाते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

गांव के निवासियों ने कई बार इस मामले की शिकायत की है, परंतु अब तक कोई उचित कदम नहीं उठाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्कूल के शिक्षक और अन्य स्टाफ बच्चों की शिक्षा पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और वे दोपहर 12:00 बजे के बाद ही स्कूल में ताला लगाकर अपनी गाड़ी से लखनऊ या बहराइच की ओर निकल जाते हैं।

मामले की मुख्य बातें:

  • सरकारी समय सारणी के अनुसार विद्यालय का समय 3:00 बजे तक है, लेकिन शिक्षक केवल 1:00 बजे ही स्कूल छोड़ देते हैं।
  • ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षक न तो बच्चों को पढ़ाने में दिलचस्पी रखते हैं और न ही समय पर स्कूल में उपस्थित रहते हैं।
  • अधिकांश समय दोपहर 12:00 बजे के बाद से स्कूल में ताला लगाकर शिक्षक लखनऊ या बहराइच की ओर निकल जाते हैं।
  • मीडिया ने इस घटना की जानकारी बेसिक शिक्षा अधिकारी बहराइच को दी है, और अब लोग कार्रवाई की उम्मीद कर रहे हैं।

प्रशासन की उदासीनता और ग्रामीणों की चिंता

ग्रामीणों का मानना है कि प्रशासन की तरफ से इस लापरवाही पर ध्यान न देना, बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के बराबर है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षकों पर कड़ी कार्रवाई का आदेश दिया गया है, लेकिन यहां के शिक्षकों पर कोई असर नहीं दिख रहा है। ऐसे में स्थानीय निवासियों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है और उन्होंने प्रशासन से जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों की मांग:

गांव के लोगों का कहना है कि ऐसे शिक्षकों को तुरंत प्रभाव से हटाया जाना चाहिए जो अपनी ड्यूटी के प्रति ईमानदार नहीं हैं। ग्रामीणों ने कहा कि बच्चों का भविष्य बनाने की जिम्मेदारी इन शिक्षकों की है, लेकिन वे अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं। इसके लिए:

  • शिक्षकों की उपस्थिति और स्कूल के समय का नियमित निरीक्षण होना चाहिए।
  • बच्चों के प्रति शिक्षकों के इस गैरजिम्मेदार रवैये के लिए सख्त सजा दी जानी चाहिए।
  • शिक्षा विभाग को इन शिक्षकों के खिलाफ कठोर कदम उठाने चाहिए, ताकि अन्य शिक्षकों को भी इस घटना से सबक मिले।
  • अभिभावकों को बच्चों की पढ़ाई के प्रति शिक्षकों की लापरवाही के बारे में समय-समय पर जानकारी मिलनी चाहिए।

अब देखने वाली बात यह है कि प्रशासन इस घटना के बारे में किस प्रकार की कार्रवाई करता है और बच्चों का भविष्य कैसे सुरक्षित होता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जल्द ही उचित कदम उठाए जाएंगे, जिससे इस समस्या का समाधान हो सके और बच्चों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्राप्त हो सके।