Key Highlights
- निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में आत्महत्या कर ली।
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में उसे 12 मामलों में मौत की सजा से बरी किया था।
- लगभग 19 साल जेल में बिताने के बाद वह आजाद हुआ था और हरिद्वार में चाय की दुकान चला रहा था।
निठारी कांड के बरी आरोपी सुरेंद्र कोली ने की आत्महत्या
देश को हिला देने वाले निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपियों में से एक सुरेंद्र कोली ने आत्महत्या कर ली है। हरिद्वार में एक चाय की दुकान में उसका शव फंदे से लटका मिला। यह खबर तब सामने आई है, जब कुछ ही समय पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उसे 12 मामलों में मौत की सजा से बरी किया था। इस घटना ने एक बार फिर उस खौफनाक अध्याय की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने पूरे देश को सदमे में डाल दिया था।
जेल से रिहाई के बाद नई जिंदगी का प्रयास और दुखद अंत
सुरेंद्र कोली का नाम साल 2006 में नोएडा के निठारी गांव में सामने आए जघन्य सीरियल किलिंग मामले से जुड़ा था। इस केस ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। आरोप था कि कोली और उसके मालिक मनिंदर सिंह पंढेर ने बच्चों और एक युवती की हत्या कर उनके शवों को नाले में फेंका था। लगभग 19 वर्षों तक कोली जेल में रहा। निचली अदालतों ने उसे फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन, हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव का हवाला देते हुए उसे लगभग सभी मामलों में बरी कर दिया।
हरिद्वार में चाय की दुकान और संदिग्ध मौत
जेल से रिहा होने के बाद कोली हरिद्वार आ गया था। उसने वहां एक छोटी सी चाय की दुकान खोली थी। जीवन की नई शुरुआत करने का वह प्रयास कर रहा था। स्थानीय पुलिस के मुताबिक, बुधवार सुबह उसकी दुकान का शटर अंदर से बंद था। जब काफी देर तक कोई हलचल नहीं दिखी, तो पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर शव बरामद किया। प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, हालांकि पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है। फॉरेंसिक टीम भी मौके पर पहुंची है।
निठारी कांड: एक भयावह इतिहास
निठारी कांड भारत के सबसे कुख्यात आपराधिक मामलों में से एक है। 2006 में नोएडा के निठारी गांव में बच्चों के कंकाल मिलने के बाद इस मामले का खुलासा हुआ था। मनिंदर सिंह पंढेर के घर के नौकर सुरेंद्र कोली पर बच्चों को बहला-फुसलाकर घर लाने, उनकी हत्या करने, दुष्कर्म करने और यहां तक कि नरभक्षण जैसे आरोप लगे थे। इस मामले ने उस समय सुरक्षा और न्याय व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। हाई कोर्ट से बरी होने के बाद भी कोली का अतीत उसका पीछा नहीं छोड़ पाया, और अब उसका अंत एक और दुखद मोड़ पर हुआ है।
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