मुख्य बातें

  • एस. अनिता के भाई एस. मणि रत्नम ने NEET पर अपनी पीड़ा व्यक्त की।
  • मणि रत्नम ने कहा, 'NEET ने मेरे परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया है।'
  • यह बयान तमिलनाडु में NEET के विरोध पर चल रही बहस के बीच आया है।

तमिलनाडु की पहली NEET पीड़िता एस. अनिता के भाई एस. मणि रत्नम ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के प्रति अपनी गहरी पीड़ा व्यक्त की है। उनका स्पष्ट बयान, ‘NEET ने मेरे परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया है,’ राज्य भर में इस प्रवेश परीक्षा पर चल रही बहस को और तेज कर रहा है। यह बयान एक बार फिर उस दुखद घटना की याद दिलाता है जिसने तमिलनाडु में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों को जन्म दिया था।

अनिता की कहानी कई लोगों के लिए एक दुखद प्रतीक बन गई है। 2017 में, अरियालुर जिले की रहने वाली अनिता ने 12वीं कक्षा में शानदार 1176/1200 अंक हासिल किए थे। उनका सपना डॉक्टर बनने का था, लेकिन NEET परीक्षा में उनके कम अंक (86/720) ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया। उन्होंने NEET को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी दी थी, उनका तर्क था कि यह ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था।

न्यायालय के फैसले के बाद, 1 सितंबर 2017 को अनिता ने आत्महत्या कर ली। इस घटना ने पूरे तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शनों की लहर दौड़ा दी, जिसमें NEET को समाप्त करने की मांग की गई। अनिता की मृत्यु के बाद से, उनके परिवार ने NEET के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखी है, यह तर्क देते हुए कि यह शिक्षा प्रणाली में समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है।

एस. मणि रत्नम का नवीनतम बयान उनके परिवार द्वारा झेले गए निरंतर दर्द और संघर्ष को उजागर करता है। उनकी बहन की मृत्यु के वर्षों बाद भी, परिवार उस नुकसान से उबर नहीं पाया है। उनका कहना है कि NEET न केवल एक परीक्षा है, बल्कि उनके जैसे कई परिवारों के लिए एक दर्दनाक अनुभव का स्रोत भी बन गई है।

💡 Did You Know? राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) को पूरे भारत में चिकित्सा महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए एक समान मानदंड स्थापित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया था।

तमिलनाडु सरकार लंबे समय से NEET का विरोध कर रही है और इसे रद्द करने की मांग कर रही है, यह तर्क देते हुए कि यह राज्य बोर्ड के पाठ्यक्रम का पालन करने वाले छात्रों के लिए एक बाधा है। अनिता का मामला राज्य में इस विरोध का एक महत्वपूर्ण बिंदु बना हुआ है। परिवार का यह दर्दनाक बयान राज्य में NEET के विरोध की भावनात्मक और मानवीय लागत को फिर से केंद्र में लाता है।

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