मुख्य बातें

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' में देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोपरि बताया।
  • उन्होंने नागरिकों से अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहने और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
  • 'मन की बात' के इस संस्करण में युवाओं और महिला शक्ति की भूमिका पर भी विशेष ज़ोर दिया गया।

राष्ट्र सुरक्षा: हर नागरिक का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के दौरान एक बार फिर देश की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा केवल जवानों का कर्तव्य नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों के शौर्य और समर्पण का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण तभी संभव है जब नागरिक सतर्क रहें और देश की अखंडता पर आंच न आने दें। यह सीधा संदेश था कि सुरक्षा की भावना राष्ट्रीय प्रगति की नींव है।

आत्मनिर्भरता की राह: 'वोकल फॉर लोकल' का मंत्र

प्रधानमंत्री ने 'मन की बात' में आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने के लिए 'वोकल फॉर लोकल' के मंत्र को दोहराया। उन्होंने कहा कि छोटे कारीगरों, हस्तशिल्पियों और स्थानीय उद्योगों को समर्थन देना देश की आर्थिक रीढ़ को मजबूत करने के समान है। यह केवल आर्थिक विकास का मामला नहीं, बल्कि देश की क्षमता और रचनात्मकता को विश्व पटल पर लाने का एक ज़रिया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़ने से न केवल रोजगार के अवसर पैदा होते हैं, बल्कि भारत की अपनी एक विशिष्ट पहचान भी बनती है।

💡 क्या आप जानते हैं? 'मन की बात' कार्यक्रम, जो हर महीने के आखिरी रविवार को प्रसारित होता है, देश और विदेश में लाखों लोगों द्वारा सुना जाता है, जो इसे भारत का एक महत्वपूर्ण संवाद मंच बनाता है।

युवा शक्ति और महिला सशक्तिकरण: राष्ट्र निर्माण के स्तंभ

कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं की ऊर्जा और महिला शक्ति की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज का युवा नवाचार (innovation) और उद्यमशीलता (entrepreneurship) के माध्यम से देश को नई दिशा दे रहा है। वहीं, महिलाओं ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर साबित किया है कि वे किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने युवाओं से देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने और महिलाओं को समान अवसर प्रदान करने पर जोर दिया, क्योंकि वे राष्ट्र निर्माण के दो सशक्त स्तंभ हैं।

यह 'मन की बात' का एक ऐसा संस्करण रहा, जिसने एक बार फिर नागरिकों को सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों की याद दिलाई। यह निरंतर संवाद नागरिकों को प्रेरित करता है और देश को एक सामूहिक लक्ष्य की ओर ले जाता है।

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