Key Highlights

  • सत्य निकेतन में पुरानी इमारत ढहने से एक छात्र की मौत, कई घायल।
  • एक वरिष्ठ छात्र का दिल दहला देने वाला बयान: 'मैंने अपना जूनियर खो दिया'।
  • हादसे ने इलाके में जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए।

दिल्ली के व्यस्त सत्य निकेतन इलाके में मंगलवार सुबह एक पुरानी इमारत अचानक ढह गई। इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। मलबे के ढेर में कई सपने दब गए। एक छात्र की मौत की खबर ने कैंपस और आसपास के पीजी में मातम का माहौल बना दिया। दुख और सदमे के बीच, एक वरिष्ठ छात्र का बयान रोंगटे खड़े कर देता है।

'मेरा पीजी सिर्फ 5 इमारतें दूर है'

हादसे के तुरंत बाद बचाव दल मौके पर पहुंचा। भीड़ और चीख-पुकार के बीच, एक युवा छात्र की आँखों में बेबसी साफ झलक रही थी। उसने डबडबाई आँखों से बताया, "मैंने सत्य निकेतन हादसे में अपना जूनियर खो दिया। मेरा पीजी सिर्फ 5 इमारतें दूर है।" यह बयान सिर्फ एक वाक्य नहीं, बल्कि उस दर्द, भय और अनिश्चितता का प्रतिबिंब है जो इस त्रासदी ने पैदा की है। उसका जूनियर, जो कुछ देर पहले तक उसके साथ था, अब सिर्फ यादों में सिमट गया था। पास ही रहने के कारण उसने तबाही को बेहद करीब से देखा था।

छात्रों के लिए डरावना मंजर

सत्य निकेतन क्षेत्र अपनी सस्ती छात्र आवास सुविधाओं और पीजी के लिए जाना जाता है। यहां देशभर से छात्र उच्च शिक्षा के लिए आते हैं। मंगलवार को हुआ यह हादसा उन सभी छात्रों के लिए एक भयावह अनुभव था, जो अपने घरों से दूर यहाँ रहते हैं। कई छात्र अपनी कक्षाओं में जा रहे थे, जब उन्हें जोरदार धमाका सुनाई दिया। देखते ही देखते धूल का गुबार और चीखें सुनाई देने लगीं। स्थानीय निवासियों और साथी छात्रों ने तुरंत मदद के लिए हाथ बढ़ाए।

बचाव अभियान और चुनौतियाँ

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और दिल्ली अग्निशमन सेवा के जवान तुरंत मौके पर पहुंचे। संकरी गलियां और मलबे का ढेर बचाव अभियान में बड़ी चुनौती पेश कर रहा था। भारी मशीनों को लाना मुश्किल था। बचावकर्मी हाथों और छोटे उपकरणों से मलबे को हटा रहे थे, हर पल किसी के जिंदा होने की उम्मीद लिए। कई घंटों तक चले इस अभियान के बाद, कुछ घायलों को बाहर निकाला गया। उन्हें तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। दुर्भाग्यवश, एक छात्र को बचाया नहीं जा सका।

सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल

यह घटना एक बार फिर दिल्ली की पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करती है। सत्य निकेतन जैसी घनी आबादी वाले इलाकों में कई इमारतें दशकों पुरानी हैं, जिनकी मरम्मत और रखरखाव पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। विशेषज्ञ लगातार इस बात पर जोर देते रहे हैं कि ऐसी इमारतों की नियमित जांच और सुरक्षा ऑडिट बेहद जरूरी है। इस त्रासदी ने प्रशासन को नींद से जगाने का काम किया है। दिल्ली सरकार ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की बात कही है।

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