Key Highlights
- पर्यावरणविद सोनम वांगचुक का लद्दाख के लिए अनशन जारी है, उन्होंने अपना वजन भी काफी कम कर लिया है।
- अभिजीत दीपके ने सरकार की चुप्पी को 'क्रूरता' बताते हुए पांच तीखे सवाल पूछे हैं।
- दीपके ने सोनम वांगचुक के राजनीति में आने की अटकलों को खारिज करते हुए उनकी सक्रियता को स्पष्ट किया।
लद्दाख की मांग और वांगचुक का दृढ़ अनशन
लद्दाख के पर्यावरणविद सोनम वांगचुक का अनशन जारी है। वे लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं। इस लंबी भूख हड़ताल के दौरान वांगचुक का वजन 8.5 किलोग्राम तक घट गया है। उनकी बिगड़ती सेहत के बावजूद, केंद्र सरकार की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया न मिलने पर देशभर में चिंता व्यक्त की जा रही है।
सरकार की खामोशी पर अभिजीत दीपके के तीखे सवाल
सोनम वांगचुक के अनशन पर सरकार की चुप्पी ने कई लोगों को आक्रोशित किया है। इसी क्रम में, अभिजीत दीपके ने सरकार के रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इस चुप्पी को ‘क्रूरता’ बताया। दीपके ने सरकार से पांच सीधे सवाल पूछे हैं। उन्होंने जानना चाहा कि क्या सरकार को वांगचुक की सेहत की कोई परवाह नहीं है? क्या लद्दाख के लोगों की आवाज मायने नहीं रखती? सरकार अपने ही वादों को क्यों भूल गई है? आखिर एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है? ये प्रश्न सरकार की उदासीनता पर सीधे वार हैं।
“क्या वांगचुक राजनीति में आएंगे?” - दीपके का स्पष्ट जवाब
सोनम वांगचुक के अनशन के बीच उनके राजनीति में आने की अटकलें भी तेज हो गई हैं। इस सवाल पर अभिजीत दीपके ने बेहद स्पष्ट जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि सोनम वांगचुक कभी राजनीति में नहीं आएंगे। उनका कहना है कि वांगचुक का संघर्ष पद या सत्ता के लिए नहीं है। वे लद्दाख और उसके लोगों के भविष्य के लिए लड़ रहे हैं। दीपके ने जोर देकर कहा कि वांगचुक एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उनका पूरा जीवन पर्यावरण और शिक्षा के लिए समर्पित रहा है। राजनीति से उनका दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है।
संसद मार्च की तैयारी और जन समर्थन
इस बीच, वांगचुक के समर्थन में लद्दाख क्लाइमेट एक्शन ग्रुप (CJP) ने दिल्ली में संसद मार्च का ऐलान किया है। यह मार्च लद्दाख के अधिकारों के प्रति सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। देशभर से उन्हें भारी समर्थन मिल रहा है। लद्दाख के लोग अपनी पहचान और पर्यावरण की रक्षा के लिए वांगचुक के साथ खड़े हैं।
वांगचुक का अनशन एक बड़े आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। सरकार पर अब इस मुद्दे को गंभीरता से लेने का दबाव बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस स्थिति से कैसे निपटती है। इस मुद्दे पर अधिक विस्तृत कवरेज के लिए, Vews.in पर विजिट करते रहें।