मुख्य बिंदु
- केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सोनम वांगचुक से मुलाकात की।
- दोनों मंत्रियों ने उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली और अनशन समाप्त करने की अपील की।
- यह मुलाकात लद्दाख में चल रहे पर्यावरण और विकास संबंधी मुद्दों के बीच हुई है।
स्वास्थ्य का जायजा लेने पहुंचे मंत्री
नई दिल्ली: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी डॉ. जितेंद्र सिंह आज गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल पहुंचे। उन्होंने प्रसिद्ध लद्दाखी जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से मुलाकात की, जो अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। दोनों मंत्रियों ने अस्पताल में श्री वांगचुक के स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में जानकारी ली और उन्हें सरकार की ओर से हर संभव मदद का आश्वासन दिया।
अनशन समाप्त करने की अपील
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्रियों ने सोनम वांगचुक से आग्रह किया कि वे अपना अनशन समाप्त करें। मंत्रियों ने कहा कि उनकी मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है और इस मुद्दे पर बातचीत के लिए सरकार हमेशा तैयार है। श्री वांगचुक अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से अनशन पर हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है।
लद्दाख के मुद्दे पर गरमाई सियासत
सोनम वांगचुक का अनशन लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा प्रदान करने और औद्योगिक विकास पर रोक लगाने की मांग को लेकर चल रहा है। इस मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। हाल के दिनों में कई राजनीतिक हस्तियां और सामाजिक कार्यकर्ता भी उनसे मिलने पहुंच चुके हैं। मंत्रियों की यह यात्रा इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आगे क्या?
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि केंद्रीय मंत्रियों की इस मुलाकात का क्या असर होता है। श्री वांगचुक अपने अनशन को जारी रखेंगे या सरकार के आश्वासन के बाद इसे समाप्त करेंगे, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
सोनम वांगचुक कौन हैं?
सोनम वांगचुक एक भारतीय आविष्कारक, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता हैं। उन्हें 'थ्री इडियट्स' फिल्म के चरित्र के लिए प्रेरणा स्रोत के रूप में भी जाना जाता है।
सोनम वांगचुक की मुख्य मांगें क्या हैं?
उनकी मुख्य मांगों में लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा प्रदान करना और क्षेत्र में औद्योगिक विकास पर रोक लगाना शामिल है, ताकि स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा हो सके।
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