Key Highlights

  • ईरान के विदेश मंत्री ने ट्रम्प के 'आर्थिक डी-डे' को खारिज किया।
  • उन्होंने इसे देश पर दबाव बनाने की एक 'विफल नीति' बताया।
  • यह बयान अमेरिकी प्रतिबंधों की निरंतर चर्चा के बीच आया है।

ईरान के विदेश मंत्री, हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा ईरान के खिलाफ चलाए गए 'आर्थिक डी-डे' अभियान को पूरी तरह से असफल करार दिया है। उनका यह बयान ईरान के ऊपर लगे कड़े अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के प्रभावों और उनके वांछित लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनकी अक्षमता पर एक सीधी टिप्पणी है। अब्दुल्लाहियान ने स्पष्ट किया कि इन प्रतिबंधों से ईरान की जनता को केवल कष्ट झेलने पड़े, लेकिन वे ईरानी सरकार की नीतियों को बदलने में कामयाब नहीं हुए। यह एक पुरानी नीति थी, जो अब विफल साबित हुई।

ईरान के विदेश मंत्री का सीधा बयान

अमीर-अब्दुल्लाहियान ने हाल ही में एक सार्वजनिक मंच से इस विषय पर अपनी बात रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रम्प प्रशासन का इरादा ईरान की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाना था। उनका मकसद ईरान को वार्ता की मेज पर मजबूर करना था, लेकिन यह रणनीति पूरी तरह से धराशायी हो गई। ईरान ने इन दबावों के बावजूद अपनी संप्रभुता और नीतियों पर अडिग रहने का संकल्प दिखाया। उनका कहना था कि ये प्रतिबंध केवल ईरानी लोगों के जीवन को प्रभावित कर सकते थे, उनके दृढ़ संकल्प को नहीं।

'आर्थिक डी-डे' और उसका इतिहास

'आर्थिक डी-डे' शब्दावली ट्रम्प प्रशासन के दौरान व्यापक रूप से इस्तेमाल की गई थी। इसका सीधा संबंध 2018 में अमेरिका द्वारा ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से एकतरफा हटने और उसके बाद ईरान पर फिर से कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाने से था। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य ईरान के तेल निर्यात को शून्य करना, उसकी बैंकिंग प्रणाली को बाधित करना और उसके परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाना था। अमेरिकी प्रशासन का मानना था कि इससे ईरान की सरकार पर भारी आर्थिक दबाव पड़ेगा और वह अपनी क्षेत्रीय गतिविधियों और परमाणु महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटेगी।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव

इन प्रतिबंधों का ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। तेल निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई। मुद्रास्फीति आसमान छूने लगी और ईरानी रियाल का मूल्य तेजी से गिरा। आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ीं, जिससे आम नागरिक बुरी तरह प्रभावित हुए। इसके बावजूद, ईरान सरकार ने इन दबावों का सामना करने के लिए विभिन्न आंतरिक आर्थिक नीतियां अपनाईं और बाहरी सहयोग की तलाश जारी रखी। विदेश मंत्री का बयान इस बात पर भी जोर देता है कि ईरान ने इस आर्थिक घेराबंदी के बीच भी अपनी प्रगति जारी रखी है।

💡 Did You Know? अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान ने अपनी तेल उत्पादन क्षमता को बनाए रखा है और अक्सर विभिन्न गुप्त माध्यमों से तेल का निर्यात जारी रखा है, जिससे इन प्रतिबंधों की पूर्ण प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं।

अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिक्रिया

अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में इन प्रतिबंधों को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं रही हैं। कई यूरोपीय देश, जो परमाणु समझौते के समर्थक थे, उन्होंने अमेरिका के एकतरफा कदम पर चिंता व्यक्त की थी। उनका मानना था कि प्रतिबंधों से केवल स्थिति और जटिल होगी। ईरान लगातार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इन प्रतिबंधों को गैर-कानूनी और अन्यायपूर्ण बताता रहा है। विदेश मंत्री का यह ताजा बयान एक बार फिर इस मुद्दे को वैश्विक चर्चा के केंद्र में लाता है। यह दिखाता है कि ईरान अपनी स्थिति पर कितना दृढ़ है और भविष्य की वार्ताओं के लिए अपनी शर्तों को मजबूत करना चाहता है।

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