सऊदी विनती पर हूती हमले का आदेश, फिर अचानक यू-टर्न: ट्रंप के फैसले ने बढ़ाई हलचल
संयुक्त राज्य अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का आदेश दिया था, लेकिन कुछ ही समय बाद इस फैसले को वापस ले लिया। यह घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब सउदी अरब ने ट्रंप से हूती हमलों को रोकने के लिए हस्तक्षेप की गुहार लगाई थी। इस अप्रत्याशित फैसले ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है।
सूत्रों के अनुसार, सउदी अरब, जो स्वयं हूती हमलों का निशाना बनता रहा है, ने ट्रंप प्रशासन से आग्रह किया था कि वह यमन में हूती ठिकानों पर निर्णायक कार्रवाई करे। सउदी नेतृत्व का मानना था कि ऐसे हमले क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने और अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए आवश्यक हैं। ट्रंप ने प्रारंभिक तौर पर इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए हूती विद्रोहियों पर सैन्य कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए थे।
अचानक फैसला पलटने की वजहें क्या रहीं?
हालांकि, कुछ ही समय के भीतर, ट्रंप ने अपने ही आदेश को पलट दिया। इस अचानक यू-टर्न के पीछे के कारणों का अभी पूरी तरह से खुलासा नहीं हुआ है। विश्लेषकों का मानना है कि इस फैसले को बदलने के कई संभावित कारण हो सकते हैं। इनमें शामिल हैं:
- सैन्य कार्रवाई के संभावित विनाशकारी परिणाम और क्षेत्र में बढ़ते तनाव का डर।
- यह चिंता कि इस तरह की कार्रवाई हूती विद्रोहियों को और अधिक उकसा सकती है।
- संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से आने वाला संभावित दबाव।
- ट्रंप प्रशासन के भीतर ही इस कदम के विरोध या अनिश्चितता की स्थिति।
इस पूरे घटनाक्रम ने यमन संघर्ष को लेकर अमेरिकी नीति की अनिश्चितता को फिर से उजागर किया है। हूती, जिन्हें कुछ देश ईरान का समर्थन प्राप्त मानते हैं, ने यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर रखा है और वे सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात के खिलाफ लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले करते रहे हैं।
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का यह कदम, जो एक ओर सउदी अरब की सुरक्षा चिंताओं को संबोधित करने का संकेत देता था, वहीं दूसरी ओर इस क्षेत्र में अमेरिकी हस्तक्षेप की सीमाओं और परिणामों पर भी सवाल उठाता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि भविष्य में इस मुद्दे पर अमेरिकी प्रशासन का क्या रुख रहता है।
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