Key Highlights

  • केरल के पी.वी. अब्दुल लतीफ ने 35 साल पुराना कर्ज चुकाया।
  • उन्होंने अपने पूर्व सहकर्मी नारायण रेड्डी को ब्याज सहित ₹25,000 लौटाए।
  • यह कर्ज सऊदी अरब में ₹1000 का था, जो अब तेलंगाना में चुकाया गया।

ईमानदारी और मानवीय संबंधों की एक असाधारण मिसाल पेश करते हुए, केरल के एक शख्स ने 35 साल पहले सऊदी अरब में लिए गए एक छोटे से कर्ज को चुकाने के लिए तेलंगाना तक का सफर तय किया। यह कहानी न सिर्फ विश्वास की डोर को मजबूत करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कुछ रिश्ते समय और दूरी की सीमाओं से परे होते हैं।

सऊदी अरब से शुरू हुई दोस्ती की दास्तान

यह बात 1980 के दशक की है। केरल के कोझिकोड जिले के पी.वी. अब्दुल लतीफ सऊदी अरब में काम करते थे। उसी दौरान उनकी मुलाकात तेलंगाना के नारायण रेड्डी से हुई। रेड्डी उस वक्त आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। कठिन परिस्थितियों में, लतीफ ने अपने दोस्त को ₹1000 की मदद दी। यह राशि उस समय बहुत मायने रखती थी। कुछ समय बाद, दोनों अलग-अलग दिशाओं में चले गए और एक-दूसरे से संपर्क टूट गया।

बदले नहीं थे 'बुरे' दिन, फिर भी चुकाया कर्ज

अब्दुल लतीफ का जीवन भी आसान नहीं रहा। सऊदी से लौटने के बाद, उन्होंने केरल में छोटी-मोटी नौकरियां कीं। आर्थिक रूप से वह कभी बहुत मजबूत नहीं हुए, पर उनके दिल में अपने दोस्त का कर्ज हमेशा जीवित रहा। उन्हें यह बात लगातार कचोटती रहती थी कि उन्होंने अपना कर्ज नहीं चुकाया है। एक दिन उन्होंने ठान ली कि वह नारायण रेड्डी को ढूंढ निकालेंगे, चाहे कुछ भी हो जाए।

बिना पते-फोन नंबर के खोज

नारायण रेड्डी का कोई पता या फोन नंबर लतीफ के पास नहीं था। सिर्फ इतना याद था कि वह तेलंगाना के किसी इलाके से हैं। लतीफ ने ठान लिया था। उन्होंने तेलंगाना में अपनी खोज शुरू की। उन्होंने पुरानी यादों और कुछ धुंधली जानकारियों के सहारे लोगों से पूछताछ की। आखिरकार, कई दिनों की मशक्कत और स्थानीय लोगों की मदद से वह नारायण रेड्डी के गांव तक पहुंचे। यह मुलाकात किसी फिल्मी सीन से कम नहीं थी।

जब दोस्त मिले: ₹1000 के बदले ₹25,000

जब अब्दुल लतीफ नारायण रेड्डी के सामने खड़े हुए, तो पहले तो रेड्डी उन्हें पहचान नहीं पाए। लेकिन जैसे ही लतीफ ने उन्हें 35 साल पहले के कर्ज की याद दिलाई, रेड्डी की आंखें भर आईं। लतीफ ने मूल राशि ₹1000 के साथ ब्याज जोड़कर कुल ₹25,000 रेड्डी को सौंपे। रेड्डी यह देखकर हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि कोई इतनी पुरानी राशि चुकाने के लिए इतना सफर तय करेगा। यह पल दोनों दोस्तों के लिए बेहद भावुक था। रेड्डी ने लतीफ का हाथ पकड़कर उनका आभार व्यक्त किया।

नैतिकता और मानवीय मूल्यों की विजय

यह घटना सिर्फ एक कर्ज चुकाने भर की नहीं है। यह नैतिकता, ईमानदारी और मानवीय मूल्यों की एक शानदार जीत है। ऐसे समय में जब रिश्ते अक्सर भौतिक लाभ के इर्द-गिर्द घूमते हैं, अब्दुल लतीफ ने साबित कर दिया कि कुछ बंधन समय के साथ और मजबूत होते जाते हैं। उनकी कहानी समाज को एक महत्वपूर्ण संदेश देती है कि विश्वास और सम्मान अमूल्य हैं।

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