Key Highlights
- केरल की सुनीता देवी महीनों की मशक्कत के बाद सऊदी अरब से भारत लौटीं।
- उन्हें एक फ़र्ज़ी जॉब वीज़ा धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ा था।
- भारतीय दूतावास और सामाजिक संगठनों की मदद से उनकी वतन वापसी संभव हुई।
सऊदी अरब से घर लौटीं सुनीता देवी: धोखे की लंबी दास्तान का सुखद अंत
सऊदी अरब में वीज़ा धोखाधड़ी का शिकार हुईं भारतीय नर्स सुनीता देवी आखिरकार अपने वतन लौट आई हैं। महीनों के मानसिक उत्पीड़न और अनिश्चितता के बाद, उनकी भारत वापसी ने परिवार में खुशियों का माहौल ला दिया है। कोच्चि हवाई अड्डे पर उतरते ही उनके चेहरे पर राहत और खुशी साफ झलक रही थी।
एक झूठा वादा, एक नई हकीकत
केरल की रहने वाली सुनीता को सऊदी अरब के एक बड़े अस्पताल में नर्सिंग की नौकरी का वादा किया गया था। उन्हें बताया गया कि उन्हें आकर्षक वेतन और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। एक भर्ती एजेंट ने उनसे मोटी रकम वसूली और बदले में एक वीज़ा दिया। हालांकि, सऊदी अरब पहुंचने पर सुनीता की ज़िंदगी बदल गई। उन्हें पता चला कि उनका वीज़ा नर्स का नहीं बल्कि घरेलू कामगार का था। उनका पासपोर्ट भी ज़ब्त कर लिया गया और जिस नौकरी का वादा किया गया था, वह पूरी तरह से फ़र्ज़ी थी।
बंधुआ मज़दूरी जैसी स्थिति
कई महीनों तक सुनीता को एक परिवार के यहाँ घरेलू कामगार के रूप में काम करना पड़ा। उन्हें बहुत कम या कोई वेतन नहीं दिया गया। उनसे लगातार अधिक घंटे काम कराया जाता था। उनके पास बाहर जाने की अनुमति नहीं थी, और उन्हें अपने परिवार से भी ठीक से बात नहीं करने दी जाती थी। यह एक तरह की बंधुआ मज़दूरी जैसी स्थिति थी, जहाँ हर दिन संघर्ष और निराशा ही थी।
दूतावास तक पहुँची मदद की गुहार
अपनी विपरीत परिस्थितियों में सुनीता ने किसी तरह अपने परिवार से संपर्क किया। परिवार ने तुरंत भारतीय दूतावास, रियाद से मदद मांगी। दूतावास ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने सऊदी अधिकारियों और स्थानीय भारतीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित किया। कई भारतीय प्रवासी संगठन भी सुनीता की मदद के लिए आगे आए।
राहत की साँस: वतन वापसी
भारतीय दूतावास के लगातार प्रयासों और राजनयिक हस्तक्षेप के बाद, सुनीता देवी को आखिरकार उस परिवार की कैद से मुक्त कराया गया जहाँ वह काम कर रही थीं। उनके दस्तावेज़ों को सुरक्षित किया गया और उनकी भारत वापसी के लिए आवश्यक औपचारिकताओं को पूरा किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में कई सप्ताह लगे, लेकिन अंततः उन्हें हवाई टिकट उपलब्ध कराया गया। सुनीता देवी अपनी वतन वापसी पर बेहद भावुक थीं। उन्होंने भारतीय दूतावास और उन सभी लोगों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने उनकी इस कठिन यात्रा में मदद की।
धोखाधड़ी से सतर्क रहने की ज़रूरत
सुनीता देवी की कहानी विदेश में नौकरी की तलाश कर रहे लोगों के लिए एक चेतावनी है। ऐसे कई भर्ती एजेंट हैं जो झूठे वादे कर भोले-भाले लोगों को ठगते हैं। नौकरी के प्रस्तावों और वीज़ा की सत्यता की जांच करना बेहद ज़रूरी है। सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से ही आवेदन करना चाहिए। यह घटना विदेश मंत्रालय की प्रवासी भारतीय सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।
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