जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरशद मदनी ने 66 मकानों की चाबियाँ विस्थापितों को सौंपी

मुजफ़्फरनगर। वर्ष 2013 के दंगा पीडि़तों में उस वक्त खुशी देखने को मिली, जब विस्थापितों को अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द मौलना सय्यद अरशद मदनी ने मकानों की चाबियां उनके सुपुर्द की

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Kawal Hasan Verified Public Figure • 04 Jun, 2025 गेस्ट राइटर
August 26, 2021 • 12:02 PM  50  0
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जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरशद मदनी ने 66 मकानों की चाबियाँ विस्थापितों को सौंपी
अरशद मदनी ने 66 मकानों की चाबियाँ विस्थापितों को सौंपी
मुजफ़्फरनगर। वर्ष 2013 के दंगा पीडि़तों में उस वक्त खुशी देखने को मिली, जब विस्थापितों को अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द मौलना सय्यद अरशद मदनी ने मकानों की चाबियां उनके सुपुर्द की
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जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष अरशद मदनी ने 66 मकानों की चाबियाँ विस्थापितों को सौंपी

मुजफ़्फरनगर। वर्ष 2013 के दंगा पीडि़तों में उस वक्त खुशी देखने को मिली, जब विस्थापितों को अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिन्द मौलना सय्यद अरशद मदनी ने मकानों की चाबियां उनके सुपुर्द की। बुधवार को जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने गाँव बागोवाली में नवनिर्मित जमीयत कालोनी में 66 मकानों की चाबियाँ सन 2013 के विस्थापितों को सौंपी।

इस दौरान मौलाना सैय्यद अरशद मदनी ने कहा कि  हमारे पूर्वजो ने इस देश की खातिर बड़ी क़ुर्बानियां दी है, जिसको इतिहास कभी भुला नहीं सकता है, उन्होंने कहा कि आजादी के लिए उलमा-ए-इकराम ने 150 तक तो लगातार क़ुर्बानियां दी है, जिसकी मिसाल नही मिलती है तथा अंग्रेजो ने उलमा-ए-इकराम फांसी पर भी  चढ़ाये। मौलाना मदनी ने कहा कि  दारुल उलूम देवबंद की स्थापना भी अंग्रेजो के खि़लाफ़ स्वतंत्रता के सपूत पैदा करने के लिये की गयी थी। मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि  जमीयत उलमा-ए-हिन्द का धर्मनिरपेक्ष संविधान को बनवाने में विशेष योगदान रहा है। मौलाना मदनी ने कहा कि हम तो डटकर साम्प्रदायिकता का विरोध करते है और साम्प्रदायिकता को देश के लिए नुकसानदेह समझते है।

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