बहराइच: तेंदुए के हमले में बाल-बाल बचा श्रमिक, गांव में दहशत का माहौल

बहराइच के कतर्नियाघाट में एक श्रमिक पर तेंदुए ने हमला कर दिया। श्रमिक ने साहस दिखाते हुए अपनी जान बचाई, जिसके बाद ग्रामीण पिंजरा लगाने की मांग कर रहे हैं। जानें पूरी खबर।

बहराइच: तेंदुए के हमले में बाल-बाल बचा श्रमिक, गांव में दहशत का माहौल
बहराइच तेंदुए के हमले में बाल-बाल बचा श्रमिक,

कतर्नियाघाट वन्यजीव प्रभाग के चहलवा में खेत में काम कर रहे एक श्रमिक पर बृहस्पतिवार दोपहर अचानक एक तेंदुए ने हमला कर दिया। श्रमिक ने हिम्मत नहीं हारी और तेंदुए से भिड़ गया, जिससे उसकी जान बच गई। पास में काम कर रहे अन्य श्रमिकों के शोर मचाने पर तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। घायल श्रमिक को तत्काल सीएचसी सुजौली में इलाज के लिए ले जाया गया।

यह घटना कतर्नियाघाट वन रेंज के चहलवा गांव की है। 47 वर्षीय रामू सुबह गांव के किसान शेर सिंह के खेत में दिहाड़ी मजदूरी पर मेड़बंदी का काम कर रहे थे। उनके साथ गांव के छोटे, कौशल, रमेश, इंद्रेश, सलाम और ध्रुव सहित अन्य श्रमिक भी मौजूद थे।

अचानक हुआ हमला और श्रमिक का संघर्ष

दोपहर लगभग 12 बजे, गन्ने के खेत से निकलकर एक तेंदुए ने अचानक रामू पर हमला कर दिया। तेंदुए के हमले से रामू चीख पड़े और उन्होंने साहस दिखाते हुए उससे मुकाबला किया। यह देखकर पास में काम कर रहे अन्य मजदूर भी "हांका" (जोरदार आवाज) लगाते हुए दौड़े। दर्जनों मजदूरों को अपनी ओर आता देख, तेंदुआ रामू को छोड़कर तुरंत जंगल की ओर भाग गया।

वन विभाग ने पहुंचाया अस्पताल, ग्रामीणों में दहशत

सूचना मिलने पर वाचरों के साथ पहुंचे वन रक्षक अब्दुल सलाम ने घायल रामू को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुजौली पहुंचाया। वहां इलाज के बाद उन्हें घर भेज दिया गया।

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श्रमिकों ने बताया कि उन्होंने गन्ने के खेत में तेंदुए को उसके शावकों के साथ भी देखा है। इस हमले के बाद से गांव में दहशत का माहौल है। ग्रामीण वन विभाग से तत्काल पिंजरा लगाकर तेंदुए को पकड़ने की मांग कर रहे हैं ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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Furkan S Khan Official | Verified Expert • 05 Aug, 2014

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2013 से खाड़ी देशों में बसे भारतीयों की ज़िंदगी से पर्दा उठा रहे हैं। प्रवासियों की आवाज़ बेखौफ़ उठाते हैं। हमारे साथ जुड़ें, सच्ची ख़बरों के लिए।