मौलाना ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रशासन की लापरवाही इस घटना की एक मुख्य वजह है। उन्होंने कहा:
"प्रशासन की नाकामी इस पूरे मामले की जड़ है। यदि प्रशासन ने पहले से ही अलर्ट रहकर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाए होते, तो यह हिंसा नहीं होती। अब जब यह घटना हो चुकी है, तो प्रशासन को सख्त कदम उठाने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।"
मौलाना ने आगे कहा कि प्रशासन की ओर से दी जा रही नोटिस पूरी तरह से राजनीतिक हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई एकपक्षीय है और इसे रोकने की जरूरत है। मौलाना ने इस बात पर भी जोर दिया कि निष्पक्ष जांच के बिना प्रशासन पर भरोसा करना मुश्किल है।
डीजे और आपत्तिजनक गानों पर प्रतिबंध की मांग
मौलाना ने बताया कि पिछले कई वर्षों से यह मांग की जा रही थी कि डीजे पर रोक लगाई जाए, खासकर धार्मिक अवसरों पर। उन्होंने कहा कि:
"डीजे पर जो गाने बजाए जाते हैं, वे समाज में तनाव फैलाने का काम करते हैं। हमने बार-बार प्रशासन से यह मांग की है कि ऐसे गानों पर रोक लगाई जाए जो समाज को बांटने का काम करते हैं, लेकिन प्रशासन ने इस पर ध्यान नहीं दिया। अब हम मांग करते हैं कि ऐसे गानों पर तुरंत प्रतिबंध लगाया जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।"
उन्होंने आगे कहा कि इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासन को अधिक संवेदनशील और सतर्क होना पड़ेगा। यदि प्रशासन ने सही समय पर कार्रवाई की होती, तो यह घटना नहीं होती।
मौलाना का राजनीतिक आरोप
मौलाना क़ासमी ने इस पूरी घटना को राजनीतिक साजिश बताते हुए कहा कि जिन लोगों को घरों पर नोटिस दिए गए हैं, वे राजनीतिक आधार पर चुने गए हैं। उन्होंने कहा:
"जिन घरों को नोटिस दिया गया है, यह पूरी तरह से राजनीतिक है। इस कार्रवाई में केवल एक पक्ष को निशाना बनाया गया है, जो कि बिल्कुल गलत है। हम मांग करते हैं कि प्रशासन अपनी कार्रवाई में निष्पक्ष रहे और किसी भी व्यक्ति को अन्याय का शिकार न बनाए।"
सीबीआई जांच की मांग
मौलाना ने कहा कि इस मामले में केवल निष्पक्ष जांच ही नहीं बल्कि सीबीआई से जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यदि सीबीआई इस मामले की जांच करती है तो ही सही और निष्पक्ष न्याय की उम्मीद की जा सकती है।
निष्कर्ष: मौलाना मोहम्मद सरवर क़ासमी ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और सांप्रदायिक हिंसा की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। उन्होंने प्रशासन की लापरवाही को घटना की मुख्य वजह बताया और यह मांग की कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों।
बहराइच में बुलडोजर एक्शन पर हाईकोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बहराइच में बुलडोजर एक्शन पर 15 दिन की रोक लगा दी है। पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा जिन 23 घरों या दुकानों पर नोटिस चिपकाए गए थे, उनको जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।
"हमारे आदेश के अनुसार, देशभर में कोई भी ध्वस्तीकरण कार्य तब तक नहीं होगा जब तक सुप्रीम कोर्ट की अनुमति प्राप्त न हो।" – सुप्रीम कोर्ट
कोर्ट का आदेश और प्रशासन की प्रतिक्रिया
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि जिन लोगों को नोटिस भेजे गए हैं, उन्हें 15 दिनों के भीतर जवाब दाखिल करने का अवसर दिया जाएगा। इसके बाद, प्रशासन की ओर से उचित निर्णय लिया जाएगा।
"सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, ध्वस्तीकरण से पहले कोर्ट की अनुमति आवश्यक है। हम इस पर पूरी तरह अमल करेंगे।" – राज्य सरकार के प्रतिनिधि
हाई कोर्ट ने कहा कि 23 अक्टूबर 2024 को इस मामले की अगली सुनवाई होगी, जिसमें ध्वस्तीकरण के मामले पर विस्तृत चर्चा की जाएगी। अदालत ने प्रशासन को निर्देश दिया कि सभी जवाबों का ध्यानपूर्वक निरीक्षण किया जाए और निष्पक्षता से निर्णय लिया जाए।
वकील सैयद महफूजुर रहमान फैज़ी की प्रतिक्रिया
इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए सैयद महफूजुर रहमान फैज़ी एडवोकेट ने कहा:
"अल्हमदोलिल्लाह! आज बहराइच बुलडोज़र मामले में मैंने एक जनहित याचिका अपनी तंज़ीम APCR की तरफ से हाई कोर्ट में दाखिल की थी। कोर्ट ने स्पेशल परमिशन देकर डेमोलिशन को रोक दिया है।"
एडवोकेट फैज़ी ने आगे कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगली सुनवाई में पीड़ितों को न्याय मिलेगा और प्रशासन निष्पक्षता से कार्य करेगा।