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बेवफ़ा शायरी: टूटे ख़्वाबों का दर्द | Furkan S Khan

Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली बेवफ़ा शायरी। टूटे ख़्वाबों और बेवफ़ाई के दर्द को महसूस करें। हिन्दी में पढ़ें और साझा करें।

Saturday, September 26, 2026
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बेवफ़ा शायरी: टूटे ख़्वाबों का दर्द | Furkan S Khan
“बेवफ़ा शायरी: टूटे ख़्वाबों का दर्द | Furkan S Khan”
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Date
26 September 2026
बेवफ़ा शायरी: टूटे ख़्वाबों का दर्द | Furkan S Khan
बेवफ़ा शायरी
कल रात जो मंज़र आँखों ने देखा था एक ख़्वाब था जो हकीकत से ज़्यादा प्यारा था। जब नींद से जागा, सब ख़्वाब धुँधला सा लगा वो हसीन चेहरा, बेवफ़ा निकला। हर पल जो साथ था, वो पल भी बीत गया मेरा दिल आज भी, बस उसी को पुकारता था।
Kaafiya जागता, भागता Radeef था
F Poetry ByFurkan S Khan

यह शायरी टूटे हुए सपनों और बेवफ़ाई के दर्द को बयां करती है। कवि रात के एक हसीन ख़्वाब का ज़िक्र करता है, जो उसे हकीकत से ज़्यादा प्यारा लगता है। लेकिन जब वह जागता है, तो उसे एहसास होता है कि वह ख़्वाब भी एक बेवफ़ाई थी, और वो प्यारा चेहरा अब उसके साथ नहीं है। हर वो पल जो कभी ख़ास था, अब बीत चुका है, और कवि का दिल आज भी उसी बेवफ़ा को याद कर रहा है। यह कविता दिल के गहरे ज़ख़्मों और खोए हुए प्यार के अहसास को दर्शाती है।

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Mahira Noor
संपादक

A passionate poet who weaves emotions into beautiful words. Writing about love, heartbreak, dreams, and life, one verse at a time.

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