उदासी का बोझ: दिल को छू लेने वाली हिंदी क़िता | Furkan S Khan

Furkan S Khan की यह क़िता उदासी और अकेलेपन के गहरे अहसास को बयां करती है। जब दिल पर बोझ हो और खुशियों का मौसम पराया लगे, तब पढ़ें यह मार्मिक कविता।

Monday, September 7, 2026
AMP 0 0
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
उदासी का बोझ: दिल को छू लेने वाली हिंदी क़िता | Furkan S Khan
“उदासी का बोझ: दिल को छू लेने वाली हिंदी क़िता | Furkan S Khan”
Favicon
Vews
https://vews.in/hum-aur-zindagi/burden-of-sadness-heart-touching-hindi-qita-furkan-s-khan
Date
07 September 2026
Qita — By Furkan S Khan
दिल पर आज फिर एक बोझ सा छाया है, हर लम्हा किसी याद ने सताया है। रूह में एक अजीब सी खामोशी है, जैसे खुशियों का मौसम अब पराया है।
Qita — By Furkan S Khan
ये ग़म की दास्तान है, जो सुनाई नहीं जाती, दिल की हर बात अब बताई नहीं जाती। आँखों में नमी है, पर ये छुपायी नहीं जाती, दर्द की ये आग अब बुझाई नहीं जाती।

'बोझ सा छाया है' का अर्थ है मन पर भारीपन महसूस होना। 'सताया है' मतलब परेशान किया है। 'रूह में खामोशी' का अर्थ है आत्मा में शांति या खुशी का अभाव। 'पराया है' मतलब दूर हो गया है, अपना नहीं रहा।

'ग़म की दास्तान' का अर्थ है दुख भरी कहानी। 'सुनाई नहीं जाती' और 'बताई नहीं जाती' का मतलब है कि इतनी गहरी पीड़ा है कि उसे व्यक्त नहीं किया जा सकता। 'आँखों में नमी' आँसुओं का प्रतीक है। 'दर्द की आग' असहनीय पीड़ा को दर्शाती है।

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab
लेखक

The world’s news & beautiful Shayari, brought to you by AI. Powered by vews.in.

Comments (0)

User