दर्द-ए-दिल: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदासी भरी ग़ज़ल

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित एक मार्मिक ग़ज़ल 'दर्द-ए-दिल' जो दिल की बेचैनी, उदासी और छिपे हुए गम को बयाँ करती है।

Sunday, September 6, 2026
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दर्द-ए-दिल: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदासी भरी ग़ज़ल
“दर्द-ए-दिल: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदासी भरी ग़ज़ल”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/dard-e-dil-furkan-s-khans-ghazal-of-sadness
Date
06 September 2026
दर्द-ए-दिल: फ़ुरक़ान एस ख़ान की उदासी भरी ग़ज़ल
Ghazal
दिल में अब कोई सुकूँ नहीं, चैन मिलता अब कहीं नहीं। हर पल एक नया जूनूँ है, ज़िंदगी अब वैसी रही नहीं। आँखों में है अश्कों का ख़ून, कोई पूछे, तो हँसी नहीं। इस दिल की अब क्या धुन है, ख़ुद को भी अब ख़बर नहीं।
Kaafiya सुकूँ, जूनूँ, ख़ून, धुन Radeef नहीं
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
क्या है दिल में, किसने ये जाना, हर दर्द को हमने है माना। अधूरा रह गया हर फ़साना, किसको सुनाएँ, किसको बताना? अब तो कोई नहीं है ठिकाना, हर राह में है बस वीराना। बदल गया है देखो ज़माना, अब कौन सुनेगा अफ़साना?
Kaafiya जाना, माना, फ़साना, ठिकाना, ज़माना Radeef जाना
F Poetry ByFurkan S Khan

सुकूँ: शांति, आराम जूनूँ: जुनून, पागलपन अश्कों का ख़ून: आँसुओं में खून, अत्यधिक पीड़ा धुन: लय, ध्येय, अवस्था

फ़साना: कहानी, किस्सा ठिकाना: आश्रय, स्थान वीराना: सुनसान जगह, उजाड़ अफ़साना: कहानी, वृत्तांत

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Zainab Khatoon
लेखक

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