दर्द की राह: फ़ुर्क़ान एस खान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
फ़ुर्क़ान एस खान द्वारा रचित 'दर्द की राह' एक मार्मिक ग़ज़ल है जो उदासी, तन्हाई और जीवन के गहरे दुखों को बयाँ करती है।
नमी: आँसू, गीलापन। कमी: अभाव, कमी। गमी: दुख, उदासी। थमी: रुकी हुई, स्थिर। घनी: गहरी, सघन। जली: जलना, पीड़ा में होना।
हमसफ़र: साथ चलने वाला, साथी। असर: प्रभाव। बसर: गुज़ारा, जीवन बिताना। पत्थर: यहाँ कठोरता, बाधाओं का प्रतीक। बेखबर: अनजान, लापरवाह। दर-ब-दर: दर-दर भटकना, बेघर।
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