प्यार की गहराई: रूहानी एहसास पर एक नाज़्म

मोहब्बत की रूहानी गहराइयों को छूती 'प्यार की राह' नाज़्म। Furkan S Khan द्वारा रचित, यह कविता प्रेम के शाश्वत एहसास को बयां करती है।

Wednesday, September 9, 2026
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प्यार की गहराई: रूहानी एहसास पर एक नाज़्म
“प्यार की गहराई: रूहानी एहसास पर एक नाज़्म”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/depth-of-love-a-nazm-on-spiritual-feeling
Date
09 September 2026
प्यार की गहराई: रूहानी एहसास पर एक नाज़्म
Nazm
मोहब्बत एक दरिया है, जो बहता है, हर दिल में इक मीठा सा दर्द रहता है। ये वो एहसास है, जो रूह से कहता है, कि ज़िन्दगी का हर पल इसी से सहता है।
Kaafiya बहता, रहता, कहता, सहता Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
बहारों का मौसम है, इश्क़ का रंग चढ़ा है, हर सू फूलों की खुशबू, दिल में गुल खिला है। ये तेरी निगाहों का, कैसा जादू चला है, हर एक मंज़र अब तो, तुझसे ही सजा है।
Kaafiya चढ़ा, खिला, चला, सजा Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
ये दिल की ज़ुबाँ है, जो कोई समझता नहीं, सिवा तेरे मेरे दर्द को, कोई सुनता नहीं। मोहब्बत का ये रिश्ता, कभी मरता नहीं, जो सच्चा हो तो, वक़्त इसे मिटाता नहीं।
Kaafiya समझता, सुनता, मरता, मिटाता Radeef नहीं
F Poetry ByFurkan S Khan

दरिया: नदी (river) एहसास: अनुभव, भावना (feeling, emotion) रूह: आत्मा (soul) सहता: सहन करता है, गुज़रता है (endures, passes through)

बहारों: वसंत ऋतु का (of spring) इश्क़: प्रेम, मोहब्बत (love) हर सू: हर तरफ, हर दिशा में (everywhere, in every direction) गुल: फूल (flower) निगाहों: आँखों (eyes) मंज़र: दृश्य (scene, view)

ज़ुबाँ: भाषा (language) सिवा तेरे: तुम्हारे सिवा (except you) रिश्ता: संबंध (relationship) वक़्त: समय (time)

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Zainab Khatoon
लेखक

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