उदासी की गहराई: अधूरी कहानी | Furkan S Khan की क़िता

फरकान एस खान की इस मार्मिक क़िता 'अधूरी कहानी' में उदासी, अकेलेपन और दिल के अनजाने दर्द को महसूस करें। यह कविता हर उस भावना को छूती है जो खामोशी में पनपती है।

Sunday, August 30, 2026
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उदासी की गहराई: अधूरी कहानी | Furkan S Khan की क़िता
“उदासी की गहराई: अधूरी कहानी | Furkan S Khan की क़िता”
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Date
30 August 2026
Qita — By Furkan S Khan
जब दिल में उदासी का अंधेरा छा जाता है, हर खुशी का पल भी बेगाना सा हो जाता है। खामोशी में भी एक शोर उठता है अंदर से, जो सारी दुनिया से अनजाना सा हो जाता है।
Qita — By Furkan S Khan
जीवन के पथ पर जब पीड़ा आती है, हर राह तब अंधेरी सी लगती है। कोई सहारा न दिखता दूर-दूर तक, बस तन्हाई ही घेरी सी लगती है।
Qita — By Furkan S Khan
आँखों में नमी अब ठहर गई है, हर खुशी की आस गुज़र गई है। लबों पर मुस्कान है झूठी सी, रूह की हर साँस अब बिखर गई है।

उदासी का अंधेरा: दुख और निराशा का घनापन। बेगाना सा हो जाता है: पराया या अंजान लगने लगता है। शोर उठता है: अंदरूनी बेचैनी या पीड़ा की आवाज़। अनजाना सा: जिसे कोई न जानता हो, छिपा हुआ।

पीड़ा का पथ: जीवन का वह रास्ता जहाँ दुख और कष्ट हों। अंधेरी सी लगती है: भविष्य अंधकारमय और निराशाजनक लगता है। सहारा न दिखता: मदद या साथ देने वाला कोई नहीं दिखता। तन्हाई ही घेरी सी लगती है: अकेलापन ही चारों ओर से घेर लेता है।

नमी अब ठहर गई है: आँसू सूख गए हैं, पर दुख अंदर ही जमा है। आस गुज़र गई है: उम्मीदें खत्म हो गई हैं। झूठी सी मुस्कान: दिखावटी हँसी, अंदर से खुश न होना। साँस बिखर गई है: हिम्मत टूट गई है, जीवन में बिखराव महसूस होना।

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Zainab
लेखक

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