उदासी की गहराई: अधूरी कहानी | Furkan S Khan की क़िता
फरकान एस खान की इस मार्मिक क़िता 'अधूरी कहानी' में उदासी, अकेलेपन और दिल के अनजाने दर्द को महसूस करें। यह कविता हर उस भावना को छूती है जो खामोशी में पनपती है।
उदासी का अंधेरा: दुख और निराशा का घनापन। बेगाना सा हो जाता है: पराया या अंजान लगने लगता है। शोर उठता है: अंदरूनी बेचैनी या पीड़ा की आवाज़। अनजाना सा: जिसे कोई न जानता हो, छिपा हुआ।
पीड़ा का पथ: जीवन का वह रास्ता जहाँ दुख और कष्ट हों। अंधेरी सी लगती है: भविष्य अंधकारमय और निराशाजनक लगता है। सहारा न दिखता: मदद या साथ देने वाला कोई नहीं दिखता। तन्हाई ही घेरी सी लगती है: अकेलापन ही चारों ओर से घेर लेता है।
नमी अब ठहर गई है: आँसू सूख गए हैं, पर दुख अंदर ही जमा है। आस गुज़र गई है: उम्मीदें खत्म हो गई हैं। झूठी सी मुस्कान: दिखावटी हँसी, अंदर से खुश न होना। साँस बिखर गई है: हिम्मत टूट गई है, जीवन में बिखराव महसूस होना।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Wow
0
Sad
0
Angry
0
36°C Riyadh
Comments (0)