गहरा सन्नाटा: Furkan S Khan की दर्द भरी क़िता

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई एक दर्द भरी क़िता, जो गहरी तन्हाई और सन्नाटे के एहसास को बयां करती है।

Friday, September 4, 2026
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गहरा सन्नाटा: Furkan S Khan की दर्द भरी क़िता
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Date
04 September 2026
Qita — By Furkan S Khan
अंधेरी रात का मंज़र, सन्नाटा चारों ओर, तन्हाई की चादर ओढ़े, बैठा है ये दिल। कोई आवाज़ नहीं आती, कोई आहट नहीं, कैसी वीरान हुई ये, आज मेरी महफ़िल है।
Qita — By Furkan S Khan
हर साँस में छुपा है, एक अनकहा सा गम, आँखों से बह चला है, अश्कों का ये कारवां। कौन सुनेगा दास्ताँ, दिल के टूटे हुए, इस दुनिया में अकेले, खो गए हैं हम हैं।

मंज़र: दृश्य, नज़ारा। सन्नाटा: खामोशी। तन्हाई: अकेलापन। आहट: पदचाप, आवाज़। वीरान: सूना, उजाड़। महफ़िल: सभा, बैठक।

अनकहा: जिसे कहा न गया हो। गम: दुख, उदासी। अश्क: आँसू। कारवां: समूह, जत्था। दास्ताँ: कहानी, किस्सा।

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Zainab
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