हौसलों की उड़ान: प्रेरणादायक ग़ज़ल | Furkan S Khan की कलम से

Furkan S Khan द्वारा लिखित यह प्रेरणादायक ग़ज़ल आपको जीवन की मुश्किलों का सामना करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करेगी। हार न मानने और आगे बढ़ते रहने का संदेश।

Thursday, September 3, 2026
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हौसलों की उड़ान: प्रेरणादायक ग़ज़ल | Furkan S Khan की कलम से
“हौसलों की उड़ान: प्रेरणादायक ग़ज़ल | Furkan S Khan की कलम से”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/houslon-ki-udaan-motivational-ghazal-by-furkan-s-khan
Date
03 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
जब राहें हों मुश्किल, कदम बढ़ाए चले। जो दिल में हो ज़ज्बा, मंज़िल पाए चले। न डरना कभी हार से, हिम्मत उठाए चले। हर सुबह नई किरण, उम्मीद जलाए चले। जो ख्वाब तुमने देखे, उन्हें सच कर दिखाए चले। हर मुश्किल को हँसकर, तुम पार लगाए चले। न रुकना कभी राह में, खुशियाँ मनाए चले। हर पल को जी भर के, अपनी राह बनाए चले। ये दुनिया है इम्तिहाँ, तू खुद को चमकाए चले। हर जंग जीतता तू, बस आगे बढ़ाए चले।
Ghazal — By Furkan S Khan
जो आग दिल में है, उसे बुझा न सकते। हम अपने ख्वाबों को, यूँही भुला न सकते। हर कदम पे मुश्किलों से, हम आँखें रखते। बिना मेहनत के हम, कुछ भी पा न सकते। जो लोग करते बातें, उन्हें हम तकते। खुद को साबित किए बिना, हम रुक पा न सकते। ये वक्त है बदलने का, जो व्यर्थ में बकते। निकल पड़े हैं राह पे, अब लौट आ न सकते। तूफानों से लड़ना है, जो हम पे झकते। जीत अपनी होगी तय, हम हार मान न सकते।

ज़ज्बा: उत्साह, जुनून। किरण: रोशनी, प्रकाश की रेखा। इम्तिहाँ: परीक्षा, चुनौती। मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य। उठाए: उठाकर, साथ लेकर। जलाए: प्रज्वलित करे, जगाए। चमकाए: रोशन करे, उज्जवल बनाए।

आग: जुनून, तीव्र इच्छा। ख्वाबों: सपनों। व्यर्थ: बेकार, निरर्थक। बकते: बेकार की बातें करते। तकते: देखते, निहारते। झकते: हमला करते, परेशान करते।

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Zainab
लेखक

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