इनायत-ए-इश्क़: फ़ुर्क़त एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
फ़ुर्क़त एस ख़ान द्वारा प्रस्तुत "इनायत-ए-इश्क़" एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल है जो प्रेम, विरह और दिल की गहराइयों को बयाँ करती है। इस ग़ज़ल में इश्क़ का गहरा असर महसूस करें।
इनायत: कृपा, मेहरबानी असर: प्रभाव बसर: गुज़रना, व्यतीत होना जिगर: हृदय, कलेजा ख़बर: जानकारी जानिब: ओर, तरफ़ सफ़र: यात्रा फ़ुर्क़त: जुदाई, विरह बेक़रार: बेचैन, अधीर गुज़र: बीतना
ज़िक्र: वर्णन, चर्चा अदा: अंदाज़, शैली, नख़रा फ़िदा: न्योछावर, कुर्बान जुदा: अलग आरज़ू: इच्छा, तमन्ना रज़ा: मर्ज़ी, इच्छा बंदगी: पूजा, इबादत अदा करना: पूरा करना, निभाना बसर करना: गुज़ारना, व्यतीत करना
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