इनायत-ए-इश्क़: फ़ुर्क़त एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल

फ़ुर्क़त एस ख़ान द्वारा प्रस्तुत "इनायत-ए-इश्क़" एक ख़ूबसूरत ग़ज़ल है जो प्रेम, विरह और दिल की गहराइयों को बयाँ करती है। इस ग़ज़ल में इश्क़ का गहरा असर महसूस करें।

Thursday, September 10, 2026
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इनायत-ए-इश्क़: फ़ुर्क़त एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल
“इनायत-ए-इश्क़: फ़ुर्क़त एस ख़ान की दिल छू लेने वाली ग़ज़ल”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/inayat-e-ishq-heart-touching-ghazal-by-furkan-s-khan
Date
10 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
हर साँस में बस तेरा ही ज़िक्र अब हो रहा, तेरी इनायत का मुझ पे गहरा असर हो रहा। दिल की हर धड़कन में तेरी याद है अब तो, बिन तेरे हर पल जीवन का यूँ बसर हो रहा। तेरी एक झलक को ये आँखें तरसती हैं, न जाने किस हाल में ये मेरा जिगर हो रहा। इश्क़ में तेरे डूबा हूँ, न अपनी कोई ख़बर, हर रास्ता अब तो तेरी जानिब सफ़र हो रहा। फ़ुर्क़त में तेरी ये दिल बेक़रार है कब से, हर लम्हा जैसे सदियों का मुझ पे गुज़र हो रहा।
Ghazal — By Furkan S Khan
क्या ज़िक्र तेरी अदा का मैं अब करूँ? हर साँस में बस तुझ पे ही मैं फ़िदा करूँ। तेरी चाहत में इस दिल को यूँ लुटाया है, अब और कैसे भला खुद को तुझसे जुदा करूँ। हर आरज़ू, हर तमन्ना है बस तेरी ही, तेरी रज़ा में ही अपनी मैं भी रज़ा करूँ। ये इश्क़ तेरा ही तो है मेरी सच्ची बंदगी, तुझसे ही अपनी हर दुआ मैं अब अदा करूँ। गर तू मिले तो फिर क्या माँगना ख़ुदा से, बस तेरी ही चाहत में हर पल बसर करूँ।

इनायत: कृपा, मेहरबानी असर: प्रभाव बसर: गुज़रना, व्यतीत होना जिगर: हृदय, कलेजा ख़बर: जानकारी जानिब: ओर, तरफ़ सफ़र: यात्रा फ़ुर्क़त: जुदाई, विरह बेक़रार: बेचैन, अधीर गुज़र: बीतना

ज़िक्र: वर्णन, चर्चा अदा: अंदाज़, शैली, नख़रा फ़िदा: न्योछावर, कुर्बान जुदा: अलग आरज़ू: इच्छा, तमन्ना रज़ा: मर्ज़ी, इच्छा बंदगी: पूजा, इबादत अदा करना: पूरा करना, निभाना बसर करना: गुज़ारना, व्यतीत करना

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Zainab
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