इश्क़ का सफ़र: एक दिलकश ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा रचित 'इश्क़ का सफ़र' नामक एक दिल को छू लेने वाली ग़ज़ल, जो प्रेम की गहराई और यात्रा का वर्णन करती है।

Friday, September 4, 2026
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इश्क़ का सफ़र: एक दिलकश ग़ज़ल
“इश्क़ का सफ़र: एक दिलकश ग़ज़ल”
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Date
04 September 2026
Ghazal — By Furkan S Khan
तेरी आँखों में जो देखा, वो अजब नज़ारा ज़िंदगी की राहों में तू ही है सहारा लहरों से लड़कर पहुँचे हैं तेरे किनारा ये इश्क़ का सफ़र है, ये प्यार है हमारा
Ghazal — By Furkan S Khan
जब से तुम मिले हो, दिल है बेक़रार हर पल करता है बस तेरा ही इक़रार कहना है तुमसे, ये मेरा प्यार का इज़हार तुम्हारे बिना जीना है अब दुश्वार

नज़ारा - दृश्य, मंज़र सहारा - आसरा, मदद किनारा - तट, छोर

बेक़रार - बेचैन, व्याकुल इक़रार - स्वीकार, वादा इज़हार - प्रकट करना, व्यक्त करना दश्वार - मुश्किल, कठिन

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Zainab
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