इश्क़ की राह: फरकान एस खान की दिलकश ग़ज़ल
फरकान एस खान द्वारा रचित 'इश्क़ की राह' ग़ज़ल पढ़ें। यह ग़ज़ल सच्चे प्यार, जुदाई और आशिक़ की तड़प को बेहद ख़ूबसूरती से बयां करती है।
मंज़र: दृश्य, नज़ारा। निगाह: नज़र, दृष्टि। राह: रास्ता। फ़ना होना: मिट जाना, नष्ट हो जाना। इश्क़-ए-सदा: सच्चा प्यार। सिला: इनाम, फल। गुनाह: पाप। पनाह: शरण, आश्रय। आलम: स्थिति, अवस्था। चाह: इच्छा, चाहत। सदा: आवाज़, पुकार। आह: गहरी साँस, दर्द भरी आवाज़।
बेकरार: बेचैन, अशांत। खुमार: नशा, मस्ती। गुबार: धूल, उदासी। इंतज़ार: प्रतीक्षा। पतझड़ की बहार: विरोधाभास, खुशियों में भी उदासी। जान-ए-ग़ज़ल: ग़ज़ल की जान, प्रियतमा। निसार: कुर्बान, समर्पित। कमबख़्त: दुर्भाग्यपूर्ण, अभागा। बेइख़्तियार: बेकाबू, नियंत्रण से बाहर।
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