जीवन की राह: फ़ुरकान एस खान की प्रेरणादायक ग़ज़ल

फ़ुरकान एस खान द्वारा रचित 'जीवन की राह' ग़ज़ल में ज़िंदगी के हर पहलू को खूबसूरती से दर्शाया गया है। यह कविता आपको जीवन की अनमोल यात्रा का अनुभव कराएगी।

Saturday, August 29, 2026
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जीवन की राह: फ़ुरकान एस खान की प्रेरणादायक ग़ज़ल
“जीवन की राह: फ़ुरकान एस खान की प्रेरणादायक ग़ज़ल”
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29 August 2026
जीवन की राह: फ़ुरकान एस खान की प्रेरणादायक ग़ज़ल
Ghazal
ये ज़िंदगी एक अनोखी सी राह है, हर मोड़ पर एक नई सी चाह है। कभी आह है, कभी वाह का आलम है, हर पल में उसकी एक नई निगाह है। जो गिरकर उठा, वही तो चला है, ये तो बस हिम्मतों की पनाह है। नादानियों से भरी है ये दुनिया, यहाँ हर किसी को कुछ गवाह है। 'फ़ुरकान' कहते हैं, ये खेल है रब का, जिसे खेलना है, वही तो निबाह है।
Kaafiya राह, चाह, निगाह, पनाह, गवाह, निबाह Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
ये ज़िंदगी है क्या, बस यूँ ही आती जाती है, कभी हँसाती है, कभी रुलाती जाती है। हर मोड़ पर एक नई कहानी कहलाती है, कभी ख़ुशी की लहर, कभी ग़म लहराती जाती है। जो आज है, वो कल शायद ना रहे यहाँ पर, हर उम्मीद एक नई राह दिखाती जाती है। ग़मों को भूलो, खुशियों को गले लगाओ, ये तो सब कुछ पल में मिटाती जाती है। 'फ़ुरकान' कहते हैं, यही रीत है दुनिया की, हर रिश्ता अपना फ़र्ज़ निभाती जाती है।
Kaafiya आती, कहलाती, लहराती, मिटाती, निभाती Radeef जाती है
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
जो ज़िंदगी ने दिया है, वो सब सही है, हर फ़ैसला उसका, बस वही सही है। कभी ख़ुशी मिली, कभी ग़म मिला, जो भी हुआ है, वो सब कहीं सही है। शिकायतें ना कर, ये वक़्त का खेल है, जो आज है, वो कल शायद नहीं सही है। हर पल को जियो, हर लम्हे को अपनाओ, खुशियाँ मिलेंगी तुम्हें, बस यहीं सही है। 'फ़ुरकान' कहते हैं, ये दुनिया फ़ानी है, जो चला गया, वो लौटा कभी नहीं सही है।
Kaafiya वही, कहीं, नहीं, यहीं, सभी, कभी Radeef सही है
F Poetry ByFurkan S Khan

जीवन की राह

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: राह, चाह, निगाह, पनाह, गवाह, निबाह  |  Radeef: है
ये ज़िंदगी एक अनोखी सी राह है, हर मोड़ पर एक नई सी चाह है। कभी आह है, कभी वाह का आलम है, हर पल में उसकी एक नई निगाह है। जो गिरकर उठा, वही तो चला है, ये तो बस हिम्मतों की पनाह है। नादानियों से भरी है ये दुनिया, यहाँ हर किसी को कुछ गवाह है। 'फ़ुरकान' कहते हैं, ये खेल है रब का, जिसे खेलना है, वही तो निबाह है।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: आती, कहलाती, लहराती, मिटाती, निभाती  |  Radeef: जाती है
ये ज़िंदगी है क्या, बस यूँ ही आती जाती है, कभी हँसाती है, कभी रुलाती जाती है। हर मोड़ पर एक नई कहानी कहलाती है, कभी ख़ुशी की लहर, कभी ग़म लहराती जाती है। जो आज है, वो कल शायद ना रहे यहाँ पर, हर उम्मीद एक नई राह दिखाती जाती है। ग़मों को भूलो, खुशियों को गले लगाओ, ये तो सब कुछ पल में मिटाती जाती है। 'फ़ुरकान' कहते हैं, यही रीत है दुनिया की, हर रिश्ता अपना फ़र्ज़ निभाती जाती है।

Ghazal — By Furkan S Khan

Kaafiya: वही, कहीं, नहीं, यहीं, सभी, कभी  |  Radeef: सही है
जो ज़िंदगी ने दिया है, वो सब सही है, हर फ़ैसला उसका, बस वही सही है। कभी ख़ुशी मिली, कभी ग़म मिला, जो भी हुआ है, वो सब कहीं सही है। शिकायतें ना कर, ये वक़्त का खेल है, जो आज है, वो कल शायद नहीं सही है। हर पल को जियो, हर लम्हे को अपनाओ, खुशियाँ मिलेंगी तुम्हें, बस यहीं सही है। 'फ़ुरकान' कहते हैं, ये दुनिया फ़ानी है, जो चला गया, वो लौटा कभी नहीं सही है।

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Zainab Khatoon
लेखक

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