प्रेरणादायक ग़ज़ल: मंज़िल का सफ़र - हिम्मत और सफलता की दास्तान
फरकान एस खान द्वारा एक प्रेरणादायक ग़ज़ल 'मंज़िल का सफ़र' पढ़ें, जो जीवन की चुनौतियों का सामना करने और कभी हार न मानने की प्रेरणा देती है।
ये ज़िंदगी का सफ़र है, कभी रुकना नहीं है।
हर मोड़ पर नई मंज़िल, ये तेरा ही हुनर है।
जो गिर भी जाओ राहों में, तो फिर से उठना सीखो।
तेरी हर एक कोशिश का, ज़माने पर असर है।
न डरना मुश्किलों से तुम, ये बस इम्तिहाँ तेरा।
जो हिम्मत से खड़ा हो जाए, उसे न कोई डर है।
उठाओ सर, बढ़ाओ कदम, न घबराओ तूफ़ानों से।
जो मंज़िल दूर दिखती है, वो बस तेरी नज़र है।
Kaafiya सफ़र, हुनर, असर, डर, नज़र
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
अंधेरी रात है गर तो, नया इक दीप तुम जलाओ।
न हारो हौसला अपना, क़दम आगे को तुम बढ़ाओ।
जो ठोकर लग भी जाए तो, ज़रा भी तुम न घबराओ।
उठो, हिम्मत करो, यारों, नए अरमान तुम सजाओ।
अगर मंज़िल है तेरी दूर, तो क्या है, पाँव चलते हों।
बस अपनी धुन में तुम खोकर, हर एक मंज़िल को तुम पाओ।
ये दुनिया इम्तिहाँ लेगी, मगर तुम डोलना नहीं।
हर एक चुनौती को तुम, मुस्कुराकर तुम मिटाओ।
Kaafiya जलाओ, बढ़ाओ, सजाओ, पाओ, मिटाओ
Radeef जाओ
F
Poetry ByFurkan S Khan
ये वक़्त का पहिया है, ये चलता ही रहा, है।
न रुकना राह में अपनी, यही जीवन की सदा, है।
जो आज मुश्किलों में हो, कल उसकी बदल जाए।
न हारो हौसला अपना, ये क़ुदरत की दिशा, है।
उठो, जागो, बढ़ो आगे, न सोओ तुम यूँ ही प्यारे।
जो सोता रह गया मंज़िल, उसे कब फिर मिला, है।
न डरना हार से अपनी, ये हर इक जीत का हिस्सा।
जो गिरकर फिर से उठ जाए, उसी पर मेहर ख़ुदा, है।
Kaafiya रहा, सदा, दिशा, मिला, ख़ुदा
Radeef है
F
Poetry ByFurkan S Khan
मंज़िल का सफ़र
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: सफ़र, हुनर, असर, डर, नज़र | Radeef: है
ये ज़िंदगी का सफ़र है, कभी रुकना नहीं है।
हर मोड़ पर नई मंज़िल, ये तेरा ही हुनर है।
जो गिर भी जाओ राहों में, तो फिर से उठना सीखो।
तेरी हर एक कोशिश का, ज़माने पर असर है।
न डरना मुश्किलों से तुम, ये बस इम्तिहाँ तेरा।
जो हिम्मत से खड़ा हो जाए, उसे न कोई डर है।
उठाओ सर, बढ़ाओ कदम, न घबराओ तूफ़ानों से।
जो मंज़िल दूर दिखती है, वो बस तेरी नज़र है।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: जलाओ, बढ़ाओ, सजाओ, पाओ, मिटाओ | Radeef: जाओ
अंधेरी रात है गर तो, नया इक दीप तुम जलाओ।
न हारो हौसला अपना, क़दम आगे को तुम बढ़ाओ।
जो ठोकर लग भी जाए तो, ज़रा भी तुम न घबराओ।
उठो, हिम्मत करो, यारों, नए अरमान तुम सजाओ।
अगर मंज़िल है तेरी दूर, तो क्या है, पाँव चलते हों।
बस अपनी धुन में तुम खोकर, हर एक मंज़िल को तुम पाओ।
ये दुनिया इम्तिहाँ लेगी, मगर तुम डोलना नहीं।
हर एक चुनौती को तुम, मुस्कुराकर तुम मिटाओ।
Ghazal — By Furkan S Khan
Kaafiya: रहा, सदा, दिशा, मिला, ख़ुदा | Radeef: है
ये वक़्त का पहिया है, ये चलता ही रहा, है।
न रुकना राह में अपनी, यही जीवन की सदा, है।
जो आज मुश्किलों में हो, कल उसकी बदल जाए।
न हारो हौसला अपना, ये क़ुदरत की दिशा, है।
उठो, जागो, बढ़ो आगे, न सोओ तुम यूँ ही प्यारे।
जो सोता रह गया मंज़िल, उसे कब फिर मिला, है।
न डरना हार से अपनी, ये हर इक जीत का हिस्सा।
जो गिरकर फिर से उठ जाए, उसी पर मेहर ख़ुदा, है।
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