प्रेरणादायक गज़ल: उठो और चमको

एक सुंदर गज़ल जो आपको जीवन की चुनौतियों का सामना करने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।

Sunday, August 30, 2026
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प्रेरणादायक गज़ल: उठो और चमको
“प्रेरणादायक गज़ल: उठो और चमको”
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Date
30 August 2026
प्रेरणादायक गज़ल: उठो और चमको
Ghazal
हर पल एक नई सुबह है, तू क्यों सोता जाए मंज़िल तेरी पुकार रही, तू क्यों रोता जाए अंधेरों से मत डरना, रोशनी तुझे बुलाए हिम्मत की मशाल जला, हर मुश्किल को पार जाए सपनों को पंख लगा, ऊँची उड़ान भर जाए तू ही तू है इस दुनिया में, तू बस खुद को पहचान जाए
Kaafiya राहें, चाहें Radeef जाए
F Poetry ByFurkan S Khan
Ghazal
ख्वाबों का ये कैसा सफ़र, तू मंजिल की ओर चले राहें चाहे काँटों भरी, हौसला न तू ढले हर ठोकर एक सबक सिखाए, गिर के फिर संभले मेहनत का दामन थाम ले, मंज़िल तेरी ओर चले खुद पर यकीन रख ऐ मुसाफिर, हर सपना तेरा फले हर नया सवेरा उम्मीद लाए, अंधेरा सब छँटे
Kaafiya सफ़र, डगर Radeef चले
F Poetry ByFurkan S Khan

राहें: रास्ते, चाहें: इच्छाएँ, मंज़िल: लक्ष्य, मशाल: ज्योति, उड़ान: उड़ना

सफ़र: यात्रा, डगर: रास्ता, मंजिल: लक्ष्य, हौसला: हिम्मत, मुसाफिर: यात्री, फले: सफल हो

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Zainab Khatoon
लेखक

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