नया सवेरा: चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणादायक नज़्म

फुरकान एस खान की 'नया सवेरा' नज़्म के साथ अपने हौसले को जगाएँ। यह कविता आपको हर चुनौती का सामना करने और अपनी मंज़िल पाने के लिए प्रेरित करेगी।

Friday, September 4, 2026
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नया सवेरा: चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणादायक नज़्म
“नया सवेरा: चुनौतियों से लड़ने की प्रेरणादायक नज़्म”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/naya-savera-inspirational-nazm-for-overcoming-challenges
Date
04 September 2026
Nazm — By Furkan S Khan
रात कितनी भी हो गहरी, सुबह आनी है हर चुनौती एक नई कहानी बनानी है मत हार हौसला, तुझे मंज़िल पानी है तेरी हिम्मत ही तेरी पहचान बन जानी है
Nazm — By Furkan S Khan
सिर्फ ख्वाबों से नहीं मिलती कोई मंज़िल, ऐ दोस्त चलना होगा, डगर कितनी भी हो मुश्किल, ऐ दोस्त तेरी राहों का तू खुद ही है राहबर, ऐ दोस्त अपने हाथों से लिख अपनी किस्मत का सफ़र, ऐ दोस्त
Nazm — By Furkan S Khan
जब लगे अँधेरा घेरे, रोशनी कहाँ है? अपनी रूह में झाँक, वहीं तेरा जहाँ है कोई और नहीं आएगा, खुद ही राह बनाना है जोश और जुनून से हर पल को सजाना है

गहरी: बहुत ज़्यादा, तीव्र। चुनौती: मुश्किल काम, बाधा। हौसला: हिम्मत, साहस। मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य। पहचान: परिचय, अस्तित्व।

ख्वाबों: सपनों। मंज़िल: लक्ष्य। डगर: रास्ता, राह। मुश्किल: कठिन। राहबर: मार्गदर्शक, पथप्रदर्शक। किस्मत: भाग्य। सफ़र: यात्रा।

अँधेरा घेरे: जब अंधेरा चारों ओर से घेर ले। रोशनी: प्रकाश। रूह: आत्मा। जहाँ: दुनिया, संसार। जोश: उत्साह। जुनून: प्रबल इच्छा, लगन। सजाना: सुंदर बनाना, संवारना।

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Zainab
लेखक

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