उदासी पर नज़्म: मन की गहराइयों से
फरकान एस खान द्वारा रचित उदासी पर एक मार्मिक नज़्म, जो मन की गहराइयों में छिपी पीड़ा और खामोशी को दर्शाती है।
रूह: आत्मा (Soul), किरण: प्रकाश की रेखा (Ray of light), निगल जाती है: खा जाती है (Swallows), ख़ामोशी: चुप्पी (Silence)
आहट: हल्की आवाज़ (Faint sound), नमी: गीलापन (Wetness), अल्फाज़: शब्द (Words), अनकहे: जो कहे न गए हों (Unspoken)
ख्वाबों का शहर: सपनों का नगर (City of dreams), उजड़ गया: तबाह हो गया (Was devastated/ruined), आरज़ू: इच्छा, तमन्ना (Desire, wish), महल: बड़ा भवन (Palace), बिखर गया: टूटकर फैल गया (Scattered), वीरानों में सिमट गया: सुनसान जगहों में सिकुड़ गया (Shrunk into desolation/wilderness), अश्कों: आँसू (Tears), उतर गया: बदल गया (Transformed into)
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