उदासी पर नज़्म: मन की गहराइयों से

फरकान एस खान द्वारा रचित उदासी पर एक मार्मिक नज़्म, जो मन की गहराइयों में छिपी पीड़ा और खामोशी को दर्शाती है।

Thursday, September 3, 2026
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उदासी पर नज़्म: मन की गहराइयों से
“उदासी पर नज़्म: मन की गहराइयों से”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/nazm-on-sadness-from-the-depths-of-the-mind
Date
03 September 2026
Nazm — By Furkan S Khan
उदासी जब भी आती है, चुपके से आती है, रूह के हर कोने में धीरे से समाती है। खुशियों की हर किरण को ये निगल जाती है, बस एक गहरी ख़ामोशी छोड़ जाती है।
Nazm — By Furkan S Khan
ये खामोशी भी कैसी है, जो चीखती रहती है, हर आहट पर, दिल में बजती रहती है। आँखों में नमी बनकर, ये बहती रहती है, अनकहे अल्फाज़ बन कर, ये कहती रहती है।
Nazm — By Furkan S Khan
ख्वाबों का शहर था, जो पल भर में उजड़ गया, हर आरज़ू का महल, जैसे रेत सा बिखर गया। दिल का हर कोना, अब वीरानों में सिमट गया, खुशियों का हर चेहरा, अब अश्कों में उतर गया।

रूह: आत्मा (Soul), किरण: प्रकाश की रेखा (Ray of light), निगल जाती है: खा जाती है (Swallows), ख़ामोशी: चुप्पी (Silence)

आहट: हल्की आवाज़ (Faint sound), नमी: गीलापन (Wetness), अल्फाज़: शब्द (Words), अनकहे: जो कहे न गए हों (Unspoken)

ख्वाबों का शहर: सपनों का नगर (City of dreams), उजड़ गया: तबाह हो गया (Was devastated/ruined), आरज़ू: इच्छा, तमन्ना (Desire, wish), महल: बड़ा भवन (Palace), बिखर गया: टूटकर फैल गया (Scattered), वीरानों में सिमट गया: सुनसान जगहों में सिकुड़ गया (Shrunk into desolation/wilderness), अश्कों: आँसू (Tears), उतर गया: बदल गया (Transformed into)

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Zainab
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