जीवन की राह: अनमोल सफर पर एक क़िता
फ़ुरकान एस ख़ान द्वारा रचित यह क़िता जीवन के अनमोल सफर और उसकी विविध राहों को खूबसूरती से बयां करती है।
ये जीवन एक अनमोल सफर है,
हर मोड़ पर एक नई डगर है।
कभी धूप कभी छाँव मिलती,
कभी राहों में मंज़िल खिलती।
Kaafiya सफर, डगर, मिलती, खिलती
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Poetry ByFurkan S Khan
ज़िंदगी क्या है, एक सवाल है,
हर जवाब में नया ख़याल है।
कभी ख़ुशी कभी ग़म का डेरा,
कभी अपना कभी पराया घेरा।
Kaafiya सवाल, ख़याल, डेरा, घेरा
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Poetry ByFurkan S Khan
जीवन की राह
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: सफर, डगर, मिलती, खिलती
ये जीवन एक अनमोल सफर है,
हर मोड़ पर एक नई डगर है।
कभी धूप कभी छाँव मिलती,
कभी राहों में मंज़िल खिलती।
Qita — By Furkan S Khan
Kaafiya: सवाल, ख़याल, डेरा, घेरा
ज़िंदगी क्या है, एक सवाल है,
हर जवाब में नया ख़याल है।
कभी ख़ुशी कभी ग़म का डेरा,
कभी अपना कभी पराया घेरा।
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