प्रेम का उजास: फुरकान एस खान की हृदयस्पर्शी क़िता

फुरकान एस खान द्वारा रचित प्रेम पर एक सुंदर क़िता, जो जीवन में प्रेम की रौशनी और ताज़गी को दर्शाती है।

Tuesday, September 8, 2026
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प्रेम का उजास: फुरकान एस खान की हृदयस्पर्शी क़िता
“प्रेम का उजास: फुरकान एस खान की हृदयस्पर्शी क़िता”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/prem-ka-ujaas-furkan-s-khans-heartfelt-qita-on-love
Date
08 September 2026
प्रेम का उजास: फुरकान एस खान की हृदयस्पर्शी क़िता
Qita
जब से तुम मिले हो, ज़िंदगी में रौशनी है। हर पल में इक नई, अब तो ताज़गी है। दिल की हर धड़कन में, बस तेरी ही बंदगी है। ये इश्क़ नहीं तो क्या, रब की दी हुई ज़िंदगी है।
Kaafiya रौशनी, ताज़गी, बंदगी, ज़िंदगी Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Qita
तेरे इश्क़ में हम ऐसे, दीवाने हो गए हैं। जैसे हर मंज़िल को, अब पाने हो गए हैं। हर दर्द में भी तेरी, यादों के फ़साने हो गए हैं। ये ज़िंदगी अब तेरी, चाहत के बहाने हो गए हैं।
Kaafiya दीवाने, पाने, फ़साने, बहाने Radeef हो गए हैं
F Poetry ByFurkan S Khan
Qita
ये कैसी चाहत है, जो दिल में समा गई है। हर साँस में मेरी, बस तू ही छा गई है। तेरी यादों की ख़ुशबू, रूह में बस गई है। ये ज़िंदगी अब मेरी, बस तेरी हो गई है।
Kaafiya समा, छा, बस, हो Radeef गई है
F Poetry ByFurkan S Khan

रौशनी: प्रकाश, चमक ताज़गी: नयापन, स्फूर्ति बंदगी: आराधना, पूजा ज़िंदगी: जीवन

दीवाने: प्रेमी, पागल मंज़िल: लक्ष्य, गंतव्य फ़साने: कहानियाँ, किस्से बहाने: कारण, हेतु

चाहत: प्रेम, इच्छा समा गई: घुल गई, अंदर आ गई ख़ुशबू: सुगंध रूह: आत्मा

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Zainab Khatoon
लेखक

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