दर्द का मौसम: दिल की गहराइयों से निकली उदासी की नज़्म

फ़ुरक़ान एस ख़ान की 'दर्द का मौसम' नज़्म पढ़ें, जो दिल की ख़ामोश उदासी और अंदरूनी ग़म को बयां करती है। भावनाओं से भरी यह कविता आपको छू जाएगी।

Friday, September 4, 2026
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दर्द का मौसम: दिल की गहराइयों से निकली उदासी की नज़्म
“दर्द का मौसम: दिल की गहराइयों से निकली उदासी की नज़्म”
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04 September 2026
दर्द का मौसम: दिल की गहराइयों से निकली उदासी की नज़्म
Nazm
दिल में दर्द का मौसम ठहरा है, हर तरफ़ ख़ामोशी का पहरा है। अश्क आँखों से नहीं बहते कभी, ग़म का सागर अंदर ही गहरा है।
Kaafiya ठहरा, पहरा, गहरा Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
एक ख़ामोशी जो हर सू फैल गई, दिल की हर आरज़ू अब जल गई। आँखों में ठहरा है पानी सा कुछ, ज़िंदगी जैसे अब थम सी गई।
Kaafiya फैल, जल, थम Radeef गई
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
ये उदासी तो पुरानी दोस्त है, मेरे हर दर्द की ये पोस्ट है। कभी आती है, कभी जाती नहीं, जैसे ज़िंदगी की कोई होस्ट है।
Kaafiya दोस्त, पोस्ट, होस्ट Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

इस नज़्म में दिल की उदासी और अंदरूनी दर्द को बयान किया गया है। 'ठहरा' का अर्थ है रुका हुआ, 'पहरा' का अर्थ है निगरानी या घेरा, 'अश्क' का अर्थ है आँसू और 'ग़म का सागर' का अर्थ है दुख का अथाह समंदर।

इस नज़्म में उदासी की गहराई और उसके प्रभाव को दर्शाया गया है। 'हर सू' का अर्थ है हर तरफ़, 'आरज़ू' का अर्थ है इच्छा या ख्वाहिश, और 'थम सी गई' का अर्थ है रुक सी गई।

इस नज़्म में उदासी को एक पुराने साथी के रूप में देखा गया है जो जीवन के हर पहलू में मौजूद रहती है। 'पोस्ट' यहाँ संदेश या पड़ाव के अर्थ में है, और 'होस्ट' का अर्थ है मेज़बान या संचालक।

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Zainab Khatoon
लेखक

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