उदासी का साया: फ़ुरकान एस खान की मार्मिक नाज़्म

फ़ुरकान एस खान द्वारा लिखी गई उदासी पर एक गहरी और मार्मिक नाज़्म। इस कविता में दिल की खामोश उदासी और दर्द को महसूस करें।

Friday, September 4, 2026
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उदासी का साया: फ़ुरकान एस खान की मार्मिक नाज़्म
“उदासी का साया: फ़ुरकान एस खान की मार्मिक नाज़्म”
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Date
04 September 2026
उदासी का साया: फ़ुरकान एस खान की मार्मिक नाज़्म
Nazm
दिल में एक उदासी का साया रहता है हर लम्हा खामोशी से गहरा रहता है आँखों में नमी बनकर ठहरा रहता है ज़िंदगी में इक दर्द छुपा रहता है
Kaafiya साया, गहरा, ठहरा, छुपा Radeef रहता है
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
ख्वाबों के महल जब टूट जाते हैं दिल के सारे अरमान रूठ जाते हैं अंधेरों में हम अक्सर छूट जाते हैं गम के बादल फिर हमें घेर जाते हैं
Kaafiya टूट, रूठ, छूट, घेर Radeef जाते हैं
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
आँखों में नमी है पर बरसी नहीं है दिल में इक कसक है जो थमी नहीं है लबों पर हँसी है, पर ख़ुशी नहीं है ये कैसी उदासी है, जो कम हुई नहीं है
Kaafiya बरसी, थमी, ख़ुशी, कम हुई Radeef नहीं है
F Poetry ByFurkan S Khan

साया: परछाई, मौजूदगी। लम्हा: पल, क्षण। खामोशी: चुप्पी, शांति। नमी: गीलापन, आँसू।

ख्वाबों के महल: सपनों की दुनिया, उम्मीदें। अरमान: इच्छाएँ, अभिलाषाएँ। रूठ जाते हैं: नाराज़ हो जाते हैं, बिखर जाते हैं। छूट जाते हैं: अकेले रह जाते हैं।

नमी: गीलापन, आँसू। बरसी: बरसना, गिरना। कसक: टीस, हल्का दर्द। थमी: रुकी हुई। लबों: होंठ।

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Zainab Khatoon
लेखक

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