उदासी का साया: दिल को छू लेने वाली नाज़्म | Furkan S Khan

Furkan S Khan की कलम से उदासी और अकेलेपन पर एक दिल को छू लेने वाली नाज़्म 'उदासी का साया' पढ़ें। यह कविता मन की गहराइयों में छिपे दर्द को बयाँ करती है।

Saturday, September 5, 2026
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उदासी का साया: दिल को छू लेने वाली नाज़्म | Furkan S Khan
“उदासी का साया: दिल को छू लेने वाली नाज़्म | Furkan S Khan”
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https://vews.in/hum-aur-zindagi/shadow-of-sadness-heart-touching-nazm-by-furkan-s-khan
Date
05 September 2026
Nazm — By Furkan S Khan
उदासी का साया गहराया है, हर खुशी से मन घबराया है। ख़ामोशी ने डेरा जमाया है, कौन समझे जो दिल ने पाया है।
Nazm — By Furkan S Khan
टूटते ख़्वाबों की कहानी है ये, आँखों में ठहरा पानी है ये। हर सुबह एक नई परेशानी है ये, ज़िंदगी की बेबस निशानी है ये।
Nazm — By Furkan S Khan
दर्द की महफ़िल सजाई गई है, हर आहट में उदासी छाई गई है। रूह भी जैसे मुरझाई गई है, किसने ये कैसी रीत चलाई गई है।

साया: परछाई, छाया गहराया: और गहरा हो जाना घबराया: डरना, बेचैन होना डेरा जमाया: स्थायी रूप से ठहर जाना, कब्जा कर लेना पाया: अनुभव किया

ख़्वाबों: सपनों ठहरा पानी: रुके हुए आँसू बेबस: लाचार, असहाय निशानी: चिह्न

महफ़िल: सभा, जमावड़ा आहट: पदचाप, हल्की आवाज़ छाई: फैल गई है रूह: आत्मा मुरझाई: कुम्हला गई, उदास हो गई रीत: रिवाज़, परंपरा

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Zainab
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