खामोश आँसू: दिल के अनकहे दर्द पर एक मार्मिक क़िता

फ़ुरक़ान एस ख़ान द्वारा रचित 'खामोश आँसू' एक मार्मिक क़िता है जो दिल के भीतर छिपे दर्द और आँखों में छुपी नमी को बयां करती है। भावनाओं की गहराई को छूती यह कविता।

Friday, September 4, 2026
AMP 0 3
ह
हम और ज़िंदगी
NEWS CARD
Logo
खामोश आँसू: दिल के अनकहे दर्द पर एक मार्मिक क़िता
“खामोश आँसू: दिल के अनकहे दर्द पर एक मार्मिक क़िता”
Favicon
Vews
https://vews.in/hum-aur-zindagi/silent-tears-a-poignant-qita-on-unspoken-heartache
Date
04 September 2026
खामोश आँसू: दिल के अनकहे दर्द पर एक मार्मिक क़िता
Qita
आँखों में नमी है, पर होंठों पर हँसी है, यह कैसा दर्द है, जो चुपचाप सहती है। रूह का ये घाव, किसी को दिखता नहीं, बस भीतर ही भीतर, ये जान लेती है।
Kaafiya सहती, लेती Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan
Qita
तन्हाई का आलम, हर पल सताता है, दिल की गहराइयों में, कुछ टूट जाता है। खामोशी की चादर, हर तरफ फैली है, हर आहट पर लगता है, कोई आता है।
Kaafiya सताता, आता Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

नमी: गीलापन, आँसू। रूह: आत्मा। घाव: चोट, ज़ख्म। भीतर ही भीतर: अंदर ही अंदर, मन में ही।

तन्हाई: अकेलापन। आलम: माहौल, स्थिति। गहराइयों: गहराई में। खामोशी: चुप्पी, मौन। आहट: धीमी आवाज़, पदचाप।

Follow us:

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Wow Wow 0
Sad Sad 0
Angry Angry 0
Zainab Khatoon
लेखक

A passionate content creator sharing meaningful baby names, Islamic names and their beautiful meanings, along with the latest news and informative stories. Bringing knowledge, culture, and updates together.

Comments (0)

User