उदासी के लम्हे: Furkan S Khan की दर्द भरी ग़ज़ल

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई उदासी और तन्हाई पर एक खूबसूरत ग़ज़ल। मोहब्बत में बिछड़ने का दर्द बयां करती है।

Wednesday, September 2, 2026
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उदासी के लम्हे: Furkan S Khan की दर्द भरी ग़ज़ल
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02 September 2026
उदासी के लम्हे: Furkan S Khan की दर्द भरी ग़ज़ल
Ghazal
हर पल एक अजनबी सी उदासी, दिल में समाई हुई तन्हाई है। ये कैसा मंज़र है, कैसा ये आलम, बिना तुम्हारे मेरी रुसवाई है। हर आहट पर तुम्हें ढूँढा है हमने, हर लम्हे में तेरी परछाई है। ये रातें, ये तन्हाई, ये वीरानगी, सब तेरी याद की गवाही है। कब तक यूँ तड़पेंगे, कब तक ये सिसकेंगे, कब तक ये जुदाई है। मेरी आँखों में आँसू, होंठों पे हँसी, ये कैसी मेरी सच्चाई है।
Kaafiya तन्हाई, जुदाई Radeef है
F Poetry ByFurkan S Khan

तन्हाई: अकेलापन, अकेले होने का एहसास। रुसवाई: बदनामी, अपमान। आहट: किसी के आने या चलने की आवाज़। वीरानगी: सुनसान, उजाड़पन। गवाही: प्रमाण, सबूत। सिसकेंगे: रोते हुए आहें भरना। सच्चाई: हकीकत, सत्यता।

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Zainab Khatoon
लेखक

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