उदासी की आहें: Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली नज़्म

Furkan S Khan द्वारा लिखी गई 'उदासी की आहें' नज़्म में तन्हाई, जुदाई और दिल के ग़म का मार्मिक चित्रण है। यह कविता उन लोगों के लिए है जो अकेलेपन और यादों के बोझ तले जी रहे हैं।

Monday, September 7, 2026
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उदासी की आहें: Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली नज़्म
“उदासी की आहें: Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली नज़्म”
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07 September 2026
उदासी की आहें: Furkan S Khan की दिल को छू लेने वाली नज़्म
Nazm
हर लम्हा बेताब है, दिल में है गम का राज़, अंधेरी रातों में, यादों की है सौगात। तन्हाई में डूबा, हर पल है एक ख़्वाब, कैसे कहूँ, क्या है दिल की ये हालात? सूनी राहों पर, अकेला चलता हूँ, हर पल तेरी यादों में, आहें भरता हूँ। इस दुनिया की भीड़ में, खुद को खोता हूँ, बस तेरी ही जुदाई में, हर रात मैं जाग।
Kaafiya रात, बात, साथ Radeef जाग
F Poetry ByFurkan S Khan
Nazm
चेहरे पर मुस्कान है, पर दिल में है उदासी, भीगी पलकों में छुपी, एक अनकही कहानी। हर लम्हा जैसे थम गया, वक़्त की ये रवानी, बस यादों का सिलसिला है, जो है अब भी बाकी। तेरी बातों की ख़ुश्बू, अब भी महसूस होती है, तेरी यादों का जादू, हर पल बेबस करती है। ख़ामोशी में भी तेरा, ज़िक्र हरदम होती है, मेरी दुनिया में तेरी, कमी अब भी बाकी।
Kaafiya आँसू, ख़ुश्बू, जादू Radeef बाकी
F Poetry ByFurkan S Khan

बेताब: बेचैन, व्याकुल राज: रहस्य सौगात: उपहार, भेंट तन्हाई: अकेलापन जुदाई: बिछड़न

अनकही: जो कही न गई हो रवानी: प्रवाह, गति सिलसिला: क्रम, तारतम्य ज़िक्र: उल्लेख, चर्चा बेबस: लाचार, मजबूर

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Zainab Khatoon
लेखक

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