उदासी का मंज़र: दिल को छू लेने वाली हिंदी नज़्म
फ़ुरक़ान एस ख़ान की कलम से उदासी पर एक खूबसूरत नज़्म। पढ़ें और महसूस करें दिल के गहरे जज़्बात।
मंज़र: दृश्य, नज़ारा। उतर जाती है: गहरे बैठ जाती है। बिखर जाती है: फैल जाती है, टूट जाती है। आहट: आवाज़, पदचाप। वीरानियों: ख़ालीपन, उदासी।
परछाई: साया, छाया। साया: छाया, परछाई। ज़ख़्म: घाव। गलता है: पिघलता है, घुलता है।
तन्हाई: अकेलापन। बस जाती है: स्थायी हो जाती है। खो सी जाती है: गुम हो जाती है। ढल जाती है: बदल जाती है, समा जाती है।
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